सनातन धर्म बोर्ड

निरीक्षण निकाय प्रत्यायन (Inspection Body Accreditation) हेतु संक्षिप्त प्रक्रिया

निरीक्षण निकाय प्रत्यायन (Inspection Body Accreditation) हेतु संक्षिप्त प्रक्रिया

निरीक्षण निकाय प्रत्यायन के लिए संक्षिप्त प्रक्रिया

1. आवेदन प्रस्तुत करना

निरीक्षण निकाय (Inspection Body) निर्धारित आवेदन प्रपत्र में आवश्यक आवेदन शुल्क के साथ प्रत्यायन (Accreditation) हेतु औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करेगा।

2. मानकों का अनुपालन

आवेदक निरीक्षण निकाय को ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं का पालन करना होगा तथा ISO 9001 (नवीनतम संस्करण) अथवा ऐसा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS) बनाए रखना होगा, जो कम से कम ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती हो।

3. दस्तावेज़ प्रस्तुत करना

आवेदक निरीक्षण निकाय को SDAB को अपने गुणवत्ता मैनुअल, प्रक्रियाएँ तथा निरीक्षण कार्य से संबंधित तकनीकी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे। इनमें निम्नलिखित विवरण सम्मिलित होंगे—

(क) निरीक्षण निकाय का Type A, Type B अथवा Type C के रूप में वर्गीकरण तथा निष्पक्षता (Impartiality) एवं गोपनीयता (Confidentiality) सुनिश्चित करने हेतु अपनाई गई व्यवस्थाएँ।

(ख) किए जाने वाले निरीक्षण का प्रकार, जैसे—

  • डिज़ाइन मूल्यांकन (Design Assessment)
  • उत्पाद सत्यापन (Product Verification)
  • निरीक्षण (Inspection)
  • भौतिक परीक्षण (Physical Testing)

साथ ही इनसे संबंधित सभी प्रक्रियाएँ, कार्य निर्देश (Work Instructions) एवं लागू मानक।

(ग) ग्राहकों के साथ किए जाने वाले अनुबंध (Contract Agreements) तथा सामान्य अनुबंधीय शर्तें (Standard Clauses)।

4. दस्तावेज़ मूल्यांकन

SDAB प्रस्तुत दस्तावेज़ों का विस्तृत मूल्यांकन करेगा। यदि किसी प्रकार की कमी या असंगति पाई जाती है, तो आवेदक को आवश्यक संशोधन कर पुनः प्रस्तुत करना होगा। संतोषजनक अनुपालन के बाद ही अगला चरण प्रारंभ होगा।

5. स्थल निरीक्षण (On-Site Assessment)

आवश्यक होने पर SDAB आवेदक के कार्यालय अथवा कार्यस्थल पर जाकर निरीक्षण करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रस्तुत प्रबंधन प्रणाली व्यवहार में प्रभावी रूप से लागू है।

6. प्रत्यायन प्रदान करना

यदि स्थल निरीक्षण सफल रहता है तथा सभी आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Actions) संतोषजनक रूप से पूर्ण कर ली जाती है, तो SDAB द्वारा प्रत्यायन स्वीकृत किया जाएगा तथा निरीक्षण निकाय का नाम SDAB की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा।


1. परिचय (Introduction)

प्रत्यायन (Accreditation) एक औपचारिक एवं स्वतंत्र तृतीय-पक्ष (Third Party) मान्यता है, जो यह प्रमाणित करती है कि कोई निरीक्षण निकाय निर्धारित निरीक्षण गतिविधियों को सक्षम, निष्पक्ष तथा विश्वसनीय रूप से संपन्न करने में सक्षम है।

यह मान्यता नियामक संस्थाओं (Regulatory Authorities), उद्योगों, ग्राहकों तथा आम जनता को यह विश्वास प्रदान करती है कि संबंधित निरीक्षण कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, निष्पक्ष तथा तकनीकी रूप से विश्वसनीय तरीके से किया गया है।

यह संक्षिप्त प्रक्रिया उन प्रमुख चरणों का विवरण प्रस्तुत करती है जिनका पालन करते हुए कोई निरीक्षण निकाय Sanatan Dharma Accreditation Board (SDAB) से प्रत्यायन प्राप्त कर सकता है।

यह प्रक्रिया अत्यंत व्यवस्थित, पारदर्शी एवं कठोर है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि केवल वही संस्थाएँ प्रत्यायित हों जो तकनीकी दक्षता, गुणवत्ता प्रबंधन तथा निष्पक्षता के निर्धारित मानकों को पूर्ण रूप से पूरा करती हैं।


2. प्रारंभिक आवेदन एवं प्रतिबद्धता (Initial Application and Commitment)

2.1 औपचारिक आवेदन (Formal Application)

प्रत्यायन प्राप्त करने के इच्छुक निरीक्षण निकाय को SDAB के निर्धारित आवेदन प्रपत्र में आवश्यक एवं अप्रतिदेय (Non-refundable) आवेदन शुल्क के साथ औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करना होगा।

आवेदन में सामान्यतः निम्नलिखित विवरण सम्मिलित किए जाते हैं—

  • संस्था की कानूनी स्थिति (Legal Status)
  • स्वामित्व संरचना (Ownership Structure)
  • प्रत्यायन हेतु अपेक्षित निरीक्षण कार्यक्षेत्र (Scope of Inspection)
  • कार्यालय एवं कार्यस्थलों का विवरण
  • संगठन से संबंधित अन्य आवश्यक जानकारी

2.2 अनुरूपता की घोषणा (Declaration of Conformity)

आवेदन प्रस्तुत करते समय निरीक्षण निकाय को यह औपचारिक घोषणा करनी होगी कि वह ISO/IEC 17020:2012 (Conformity Assessment – Requirements for the Operation of Various Types of Bodies Performing Inspection) की सभी आवश्यकताओं का पूर्णतः पालन करेगा।

यह मानक विश्व स्तर पर निरीक्षण निकायों के प्रत्यायन के लिए स्वीकृत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है तथा SDAB प्रत्यायन प्रक्रिया का आधार भी यही मानक है।


2.3 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS)

आवेदक संस्था को एक दस्तावेजीकृत (Documented) गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली स्थापित एवं बनाए रखना आवश्यक होगा।

यह प्रणाली ISO 9001 (नवीनतम संस्करण) के सिद्धांतों पर आधारित हो सकती है, किन्तु कम से कम इसमें ISO/IEC 17020 की सभी प्रबंधन संबंधी आवश्यकताओं का पूर्ण अनुपालन होना अनिवार्य है।

अनेक निरीक्षण निकाय ISO 9001 तथा ISO/IEC 17020 दोनों मानकों को एकीकृत (Integrated Management System) रूप में लागू करते हैं, जिससे गुणवत्ता प्रबंधन तथा तकनीकी आवश्यकताओं का प्रभावी एवं सुव्यवस्थित पालन सुनिश्चित हो सके।


भाग–1 समाप्त

अगले भाग (भाग–2) में निम्नलिखित विषयों का विस्तृत हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया जाएगा—

  • 3. दस्तावेज़ प्रस्तुतिकरण एवं प्रारंभिक मूल्यांकन
  • 4. दस्तावेज़ समीक्षा चरण (Document Review Stage)

3. दस्तावेज़ प्रस्तुतिकरण एवं प्रारंभिक मूल्यांकन

(Documentation Submission and Preliminary Evaluation)

3.1 प्रमुख दस्तावेज़ों का प्रस्तुतिकरण

आवेदक निरीक्षण निकाय को SDAB के समक्ष अपने प्रबंधन एवं तकनीकी दस्तावेज़ों का संपूर्ण संकलन (Documentation Package) प्रस्तुत करना होगा। यह दस्तावेज़ीकरण प्रत्यायन प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि इसी के आधार पर आगामी मूल्यांकन किया जाता है।

प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज़ों में निम्नलिखित शामिल होंगे—

3.1.1 गुणवत्ता मैनुअल एवं प्रबंधन प्रक्रियाएँ

(Quality Manual and Management Procedures)

आवेदक को अपना गुणवत्ता मैनुअल (Quality Manual) प्रस्तुत करना होगा, जिसमें गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS), संगठनात्मक संरचना, गुणवत्ता नीति, उत्तरदायित्व, अधिकार एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं का स्पष्ट विवरण हो।

यह मैनुअल यह प्रदर्शित करेगा कि निरीक्षण निकाय ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं का किस प्रकार अनुपालन करता है तथा अपनी सेवाओं की गुणवत्ता को कैसे बनाए रखता है।


3.1.2 निष्पक्षता एवं गोपनीयता संबंधी घोषणा

(Statement on Impartiality and Confidentiality)

निरीक्षण निकाय को अपने संगठन का वर्गीकरण स्पष्ट रूप से घोषित करना होगा—

Type A Inspection Body

ऐसा निरीक्षण निकाय जो निरीक्षण किए जाने वाले उत्पाद, सेवा अथवा प्रक्रिया से पूर्णतः स्वतंत्र हो तथा जिस पर किसी प्रकार का व्यावसायिक, वित्तीय अथवा अन्य बाहरी प्रभाव न हो जो उसके निर्णय को प्रभावित कर सके।

Type B Inspection Body

ऐसा निरीक्षण निकाय जो किसी बड़े संगठन का पृथक एवं स्पष्ट रूप से पहचाना जाने वाला भाग हो, जहाँ वह संगठन संबंधित वस्तुओं के डिज़ाइन, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, उपयोग अथवा रखरखाव से जुड़ा हो तथा निरीक्षण सेवाएँ अपने मूल संगठन अथवा बाहरी ग्राहकों दोनों को प्रदान करता हो।

Type C Inspection Body

ऐसा निरीक्षण निकाय जो किसी बड़े संगठन का हिस्सा हो तथा संबंधित वस्तुओं के डिज़ाइन, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, उपयोग अथवा रखरखाव से जुड़ा हो, और निरीक्षण सेवाएँ केवल अपने मूल संगठन को ही प्रदान करता हो।


निरीक्षण निकाय को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसने निष्पक्षता (Impartiality) एवं गोपनीयता (Confidentiality) सुनिश्चित करने हेतु कौन-कौन सी व्यवस्थाएँ लागू की हैं, जैसे—

  • संगठनात्मक पृथक्करण (Organizational Separation)
  • प्रबंधन की निष्पक्षता संबंधी प्रतिबद्धता
  • गोपनीयता समझौते (Confidentiality Agreements)
  • हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने हेतु अपनाए गए उपाय

3.1.3 प्रत्यायन का कार्यक्षेत्र एवं तकनीकी प्रक्रियाएँ

(Scope of Accreditation and Technical Procedures)

आवेदक निरीक्षण निकाय को स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि वह किन निरीक्षण गतिविधियों के लिए प्रत्यायन प्राप्त करना चाहता है।

उदाहरणस्वरूप—

  • डिज़ाइन समीक्षा (Design Review)
  • उत्पाद सत्यापन (Product Verification)
  • सेवा अवधि निरीक्षण (In-Service Inspection)
  • गैर-विनाशकारी परीक्षण (Non-Destructive Testing – NDT)
  • आयामी निरीक्षण (Dimensional Inspection)
  • अन्य विशिष्ट निरीक्षण गतिविधियाँ

प्रत्येक गतिविधि के लिए निम्नलिखित दस्तावेज़ प्रस्तुत किए जाएंगे—

  • तकनीकी प्रक्रियाएँ (Technical Procedures)
  • कार्य निर्देश (Work Instructions)
  • निरीक्षण विधियाँ
  • लागू राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानक
  • परीक्षण एवं निरीक्षण विनिर्देश (Specifications)

3.1.4 अनुबंध संबंधी दस्तावेज़

(Contractual Agreements)

निरीक्षण निकाय को ग्राहकों के साथ किए जाने वाले मानक अनुबंध (Model Contracts) अथवा सामान्य नियम एवं शर्तें (Terms and Conditions) प्रस्तुत करनी होंगी।

इन दस्तावेज़ों में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित विषयों का उल्लेख होना चाहिए—

  • निरीक्षण सेवाओं का दायरा
  • दोनों पक्षों की जिम्मेदारियाँ
  • निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता
  • गोपनीयता संबंधी प्रावधान
  • निरीक्षण रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया
  • विवाद समाधान संबंधी प्रावधान

इन अनुबंधों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निरीक्षण सेवाएँ पारदर्शी, निष्पक्ष तथा ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रदान की जाएँ।


4. दस्तावेज़ समीक्षा चरण

(Document Review Stage)

4.1 दस्तावेज़ समीक्षा

दस्तावेज़ प्राप्त होने के पश्चात SDAB एक मुख्य मूल्यांकनकर्ता (Lead Assessor) तथा आवश्यकता होने पर संबंधित क्षेत्र के तकनीकी विशेषज्ञ (Technical Expert) को नियुक्त करेगा।

वे प्रस्तुत दस्तावेज़ों का विस्तृत डेस्क मूल्यांकन (Desk Assessment) करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दस्तावेजीकृत गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली एवं तकनीकी प्रक्रियाएँ ISO/IEC 17020 तथा अन्य लागू मानकों की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।

इस समीक्षा के दौरान विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा—

  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की उपयुक्तता
  • संगठनात्मक संरचना
  • निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता
  • तकनीकी दक्षता
  • दस्तावेज़ नियंत्रण प्रणाली
  • निरीक्षण प्रक्रियाएँ
  • अभिलेख प्रबंधन
  • लागू मानकों का अनुपालन

4.2 टिप्पणियाँ एवं आवश्यक संशोधन

(Feedback and Correction)

यदि समीक्षा के दौरान किसी प्रकार की कमी (Deficiency), त्रुटि (Error) अथवा गैर-अनुरूपता (Non-Conformity) पाई जाती है, तो SDAB एक औपचारिक दस्तावेज़ समीक्षा रिपोर्ट (Document Review Findings) जारी करेगा।

इस रिपोर्ट में सभी आवश्यक सुधार एवं टिप्पणियाँ विस्तार से अंकित होंगी।

आवेदक निरीक्षण निकाय को—

  • आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) करनी होगी।
  • संबंधित दस्तावेज़ों में संशोधन करना होगा।
  • प्रत्येक टिप्पणी का लिखित उत्तर प्रस्तुत करना होगा।
  • संशोधित दस्तावेज़ों के साथ सुधार के प्रमाण (Objective Evidence) उपलब्ध कराने होंगे।

जब तक सभी प्रमुख टिप्पणियों एवं गैर-अनुरूपताओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक आवेदक को अगले चरण अर्थात स्थल मूल्यांकन (On-Site Assessment) के लिए स्वीकृति प्रदान नहीं की जाएगी।

दस्तावेज़ समीक्षा चरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थल निरीक्षण प्रारंभ होने से पहले निरीक्षण निकाय की प्रबंधन प्रणाली एवं दस्तावेज़ पूर्णतः मानक-अनुरूप, प्रभावी तथा कार्यान्वयन हेतु तैयार हों।


5. स्थल मूल्यांकन (On-Site Assessment)

5.1 योजना एवं निष्पादन

(Planning and Execution)

जब SDAB यह सुनिश्चित कर लेता है कि प्रस्तुत दस्तावेज़ ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं, तब आवेदक निरीक्षण निकाय के परिसर में स्थल मूल्यांकन (On-Site Assessment) की योजना बनाई जाती है।

इस मूल्यांकन का उद्देश्य यह सत्यापित करना होता है कि दस्तावेज़ों में वर्णित गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS), नीतियाँ एवं प्रक्रियाएँ वास्तव में संगठन में प्रभावी रूप से लागू हैं तथा उनका पालन किया जा रहा है।

स्थल मूल्यांकन SDAB द्वारा नियुक्त मुख्य मूल्यांकनकर्ता (Lead Assessor) के नेतृत्व में किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ (Technical Experts) भी मूल्यांकन दल का हिस्सा होते हैं।

मूल्यांकन टीम निम्नलिखित गतिविधियों के माध्यम से निरीक्षण करती है—


(क) प्रबंधन एवं कर्मचारियों के साथ साक्षात्कार

(Interviews with Management and Staff)

मूल्यांकनकर्ता संस्था के वरिष्ठ प्रबंधन, गुणवत्ता प्रबंधक, तकनीकी प्रबंधक, निरीक्षकों तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हैं।

इन साक्षात्कारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि—

  • सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों एवं अधिकारों से भली-भाँति परिचित हैं।
  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का प्रभावी कार्यान्वयन हो रहा है।
  • निरीक्षण प्रक्रियाओं एवं तकनीकी आवश्यकताओं की उचित समझ उपलब्ध है।
  • निष्पक्षता (Impartiality) एवं गोपनीयता (Confidentiality) के सिद्धांतों का पालन किया जा रहा है।
  • संगठन के सभी स्तरों पर ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं का ज्ञान उपलब्ध है।

(ख) प्रत्यक्ष निरीक्षण (Witness Assessment)

(Witnessing of Live Inspections or Simulations)

मूल्यांकन दल वास्तविक निरीक्षण गतिविधियों (Live Inspection) अथवा आवश्यकतानुसार सिमुलेटेड निरीक्षण (Simulation) का प्रत्यक्ष अवलोकन करता है।

इस प्रक्रिया के दौरान यह देखा जाता है कि—

  • निरीक्षण निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है।
  • निरीक्षणकर्ता तकनीकी रूप से सक्षम है।
  • लागू मानकों एवं कार्य निर्देशों का सही पालन किया जा रहा है।
  • निरीक्षण निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से किया जा रहा है।
  • निरीक्षण परिणाम उचित तकनीकी आधार पर तैयार किए जा रहे हैं।

प्रत्यक्ष निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज़ों में वर्णित प्रक्रियाएँ व्यवहार में भी समान रूप से प्रभावी हैं।

निरीक्षण निकाय प्रत्यायन (Inspection Body Accreditation) की चरणबद्ध प्रक्रिया दर्शाने वाला हिंदी इन्फोग्राफिक, जिसमें आवेदन, दस्तावेज़ समीक्षा, प्रारंभिक मूल्यांकन, ऑन-साइट मूल्यांकन, गैर-अनुपालन का निवारण, तकनीकी समीक्षा, प्रत्यायन निर्णय, प्रमाणपत्र जारी करना और निगरानी एवं पुनर्मूल्यांकन के चरण शामिल हैं।
यह इन्फोग्राफिक निरीक्षण निकाय प्रत्यायन (Inspection Body Accreditation) की संक्षिप्त एवं चरणबद्ध प्रक्रिया को सरल फ्लोचार्ट के माध्यम से प्रस्तुत करता है, जिससे प्रत्यायन की पूरी प्रक्रिया को आसानी से समझा जा सके।

(ग) अभिलेखों की समीक्षा

(Review of Records)

मूल्यांकनकर्ता संगठन द्वारा संधारित विभिन्न अभिलेखों (Records) की विस्तृत समीक्षा करते हैं।

इन अभिलेखों में सामान्यतः निम्नलिखित सम्मिलित होते हैं—

  • उपकरण अंशांकन प्रमाणपत्र (Calibration Certificates)
  • कर्मचारियों के प्रशिक्षण अभिलेख (Training Records)
  • योग्यता एवं दक्षता अभिलेख (Competency Records)
  • निरीक्षण रिपोर्ट (Inspection Reports)
  • आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट (Internal Audit Reports)
  • प्रबंधन समीक्षा बैठक के अभिलेख (Management Review Minutes)
  • सुधारात्मक एवं निवारक कार्यवाहियों के अभिलेख
  • शिकायतों एवं अपीलों से संबंधित अभिलेख
  • दस्तावेज़ नियंत्रण अभिलेख

इन अभिलेखों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रभावी रूप से संचालित एवं प्रलेखित है।


(घ) उपकरण एवं सुविधाओं का निरीक्षण

(Examination of Equipment and Facilities)

मूल्यांकन टीम निरीक्षण कार्यों में प्रयुक्त उपकरणों, यंत्रों एवं अन्य तकनीकी संसाधनों का मूल्यांकन करती है।

इस दौरान निम्नलिखित बिंदुओं का परीक्षण किया जाता है—

  • उपकरणों की उपयुक्तता
  • अंशांकन (Calibration) की वैधता
  • उपकरणों का रखरखाव
  • पहचान एवं ट्रेसबिलिटी
  • कार्यस्थल की सुरक्षा
  • पर्यावरणीय परिस्थितियाँ
  • निरीक्षण सुविधाओं की उपलब्धता
  • परीक्षण संसाधनों की पर्याप्तता

यदि किसी उपकरण का उपयोग निरीक्षण परिणामों को प्रभावित कर सकता है, तो उसका वैध अंशांकन एवं अनुरेखण (Traceability) अनिवार्य रूप से सत्यापित किया जाता है।


(ङ) तकनीकी दक्षता का मूल्यांकन

(Evaluation of Technical Competence)

स्थल मूल्यांकन का सबसे महत्वपूर्ण भाग निरीक्षण निकाय की तकनीकी क्षमता का आकलन होता है।

इस दौरान निम्नलिखित पहलुओं की समीक्षा की जाती है—

  • निरीक्षकों की योग्यता
  • कार्य अनुभव
  • तकनीकी प्रशिक्षण
  • प्रमाणन (Certification)
  • निरीक्षण तकनीकों का ज्ञान
  • लागू मानकों की समझ
  • तकनीकी निर्णय लेने की क्षमता
  • निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने की दक्षता

मूल्यांकनकर्ता यह सुनिश्चित करते हैं कि निरीक्षण कार्य केवल योग्य एवं सक्षम कर्मचारियों द्वारा ही संपन्न किए जा रहे हैं।


स्थल मूल्यांकन का उद्देश्य

स्थल मूल्यांकन केवल दस्तावेज़ों का सत्यापन नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण एकत्रित करने की प्रक्रिया है कि निरीक्षण निकाय—

  • ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं का वास्तविक अनुपालन कर रहा है।
  • अपनी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का प्रभावी संचालन कर रहा है।
  • तकनीकी रूप से सक्षम है।
  • निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा है।
  • विश्वसनीय एवं सटीक निरीक्षण परिणाम प्रदान करने में सक्षम है।

यह चरण प्रत्यायन प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे मूल्यांकन निष्कर्ष (Assessment Findings) तैयार किए जाते हैं।


5.2 मूल्यांकन निष्कर्ष (Assessment Findings)

स्थल मूल्यांकन (On-Site Assessment) प्रत्यायन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस चरण में मूल्यांकनकर्ता केवल दस्तावेज़ों की समीक्षा ही नहीं करते, बल्कि यह भी सत्यापित करते हैं कि निरीक्षण निकाय द्वारा स्थापित गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS) वास्तव में प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है या नहीं।

स्थल मूल्यांकन के उपरांत SDAB मूल्यांकन दल अपने निरीक्षण के आधार पर मूल्यांकन निष्कर्ष (Assessment Findings) तैयार करता है।

ये निष्कर्ष केवल त्रुटियों की सूची नहीं होते, बल्कि निरीक्षण निकाय द्वारा ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के अनुपालन (Compliance) का एक व्यवस्थित एवं निष्पक्ष मूल्यांकन होते हैं।

सभी निष्कर्षों को सामान्यतः निम्नलिखित तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है—

  1. अनुरूपता (Conformities)
  2. लघु गैर-अनुरूपता (Minor Non-Conformities)
  3. प्रमुख गैर-अनुरूपता (Major Non-Conformities)

यह वर्गीकरण प्रत्यायन संबंधी अंतिम निर्णय का आधार बनता है तथा सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action) की आवश्यकता एवं गंभीरता भी इसी के आधार पर निर्धारित की जाती है।


1. अनुरूपता (Conformities)

अनुरूपता (Conformity) वह स्थिति है जिसमें यह प्रमाणित होता है कि ISO/IEC 17020 अथवा अन्य लागू मानकों की कोई विशिष्ट आवश्यकता प्रभावी रूप से पूरी की जा रही है।

जब मूल्यांकनकर्ता किसी प्रक्रिया, गतिविधि अथवा प्रबंधन व्यवस्था को पूर्णतः मानक-अनुरूप पाते हैं, तब उसे अनुरूपता के रूप में दर्ज किया जाता है।

यद्यपि अनुरूपताओं के लिए किसी सुधारात्मक कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी उनका दस्तावेजीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अनुरूपताओं का अभिलेखीकरण निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करता है—

  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन की पुष्टि करना।
  • संगठन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को पहचानना।
  • प्रबंधन एवं कर्मचारियों को सकारात्मक प्रतिपुष्टि (Positive Feedback) प्रदान करना।
  • भविष्य के मूल्यांकन के लिए एक मानक संदर्भ (Benchmark) स्थापित करना।
  • संगठन में गुणवत्ता संस्कृति को प्रोत्साहित करना।

अनुरूपताओं का अभिलेख यह भी दर्शाता है कि निरीक्षण निकाय की प्रणाली केवल दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार में भी प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।


2. लघु गैर-अनुरूपता

(Minor Non-Conformity)

लघु गैर-अनुरूपता वह स्थिति है जिसमें किसी आवश्यकता का सीमित स्तर पर अनुपालन नहीं पाया जाता, परन्तु यह कमी—

  • केवल किसी एक विशेष घटना अथवा मामले तक सीमित होती है।
  • प्रणालीगत (Systemic) विफलता का संकेत नहीं देती।
  • निरीक्षण निकाय की तकनीकी क्षमता पर संदेह उत्पन्न नहीं करती।
  • पूर्व में जारी निरीक्षण परिणामों की विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करती।

अर्थात यह किसी प्रक्रिया के पूर्णतः असफल होने का प्रमाण नहीं होती, बल्कि उसके अनुपालन में हुई एक सीमित त्रुटि या चूक को दर्शाती है।


लघु गैर-अनुरूपता की प्रमुख विशेषताएँ

1. सीमित घटना (Isolated Incident)

गैर-अनुरूपता केवल एक विशेष घटना तक सीमित होती है।

उदाहरण—

  • किसी एक निरीक्षण प्रपत्र पर हस्ताक्षर का अभाव।
  • किसी एक फ़ाइल में अंशांकन प्रमाणपत्र संलग्न न होना।
  • किसी एक रिकॉर्ड में जानकारी का अपूर्ण होना।

ऐसी स्थिति यह सिद्ध नहीं करती कि पूरी प्रणाली असफल हो गई है।


2. सीमित प्रणालीगत प्रभाव

(Limited Systemic Impact)

मूल प्रक्रिया (Procedure) प्रभावी होती है तथा सामान्य परिस्थितियों में उसका उचित पालन किया जाता है।

त्रुटि केवल किसी एक अवसर पर मानवीय भूल (Human Error) अथवा असावधानी के कारण उत्पन्न हुई होती है।

अर्थात—

  • प्रक्रिया उचित है।
  • कर्मचारी प्रशिक्षित हैं।
  • प्रणाली कार्यरत है।
  • केवल उसका अनुपालन किसी एक मामले में अधूरा रह गया।

3. निरीक्षण परिणामों पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं

(No Direct Threat to Result Validity)

मूल्यांकनकर्ता यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि उक्त कमी से—

  • निरीक्षण की विश्वसनीयता,
  • सटीकता,
  • निष्पक्षता,
  • अथवा अंतिम निरीक्षण रिपोर्ट

पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है।

अर्थात निरीक्षण परिणाम अभी भी तकनीकी रूप से स्वीकार्य एवं विश्वसनीय माने जा सकते हैं।


लघु गैर-अनुरूपता के उदाहरण

निम्नलिखित परिस्थितियाँ लघु गैर-अनुरूपता के उदाहरण हो सकती हैं—

उदाहरण 1

किसी निरीक्षक का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है, परन्तु उसकी दक्षता मूल्यांकन (Competency Assessment) पर मूल्यांकनकर्ता के हस्ताक्षर अनुपस्थित हैं।

यद्यपि रिकॉर्ड अपूर्ण है, फिर भी निरीक्षक की तकनीकी योग्यता पर कोई संदेह नहीं है।


उदाहरण 2

किसी संदर्भ मानक (Reference Standard) का अंशांकन (Calibration) अभी भी वैध है, परन्तु उस पर लगा अंशांकन स्टिकर अनजाने में हट गया है।

रिकॉर्ड से अंशांकन की पुष्टि हो जाती है, इसलिए निरीक्षण परिणाम प्रभावित नहीं होते।


उदाहरण 3

कोई गैर-महत्वपूर्ण उपकरण (Non-Critical Equipment) संस्था की उपकरण सूची में दर्ज है, किन्तु वह पिछले आंतरिक ऑडिट के दौरान समीक्षा में शामिल नहीं किया गया।

यह एक प्रशासनिक त्रुटि है, जो प्रणालीगत विफलता का संकेत नहीं देती।


लघु गैर-अनुरूपता का प्रभाव

यदि किसी निरीक्षण निकाय में केवल लघु गैर-अनुरूपताएँ पाई जाती हैं, तो सामान्यतः प्रत्यायन प्रक्रिया रोकी नहीं जाती।

हालाँकि संस्था को निम्नलिखित कार्य करना अनिवार्य होगा—

  • मूल कारण (Root Cause) का विश्लेषण।
  • आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action) का क्रियान्वयन।
  • भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने हेतु निवारक उपाय।
  • SDAB को आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करना।

यदि SDAB प्रस्तुत सुधारों से संतुष्ट होता है, तो प्रत्यायन प्रक्रिया अगले चरण में आगे बढ़ सकती है।


भाग–4 समाप्त

भाग–5 में शामिल होगा—

3. प्रमुख गैर-अनुरूपता (Major Non-Conformity)

  • प्रमुख गैर-अनुरूपता की परिभाषा
  • मानक की प्रमुख आवश्यकताओं का उल्लंघन
  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की विफलता
  • विस्तृत उदाहरण
  • प्रमुख एवं लघु गैर-अनुरूपताओं का अंतर
  • प्रत्यायन पर उनका प्रभाव

3. प्रमुख गैर-अनुरूपता

(Major Non-Conformity)

प्रमुख गैर-अनुरूपता (Major Non-Conformity) एक गंभीर प्रकार की गैर-अनुरूपता है। यह ऐसी प्रणालीगत (Systemic) अथवा महत्वपूर्ण विफलता को दर्शाती है, जो निरीक्षण निकाय की निरंतर विश्वसनीय, निष्पक्ष एवं तकनीकी रूप से सही निरीक्षण सेवाएँ प्रदान करने की क्षमता पर प्रत्यक्ष प्रश्नचिह्न लगाती है।

जब किसी निरीक्षण निकाय में प्रमुख गैर-अनुरूपता पाई जाती है, तो सामान्यतः प्रत्यायन प्रक्रिया तब तक आगे नहीं बढ़ाई जाती जब तक कि संबंधित गैर-अनुरूपता का पूर्ण समाधान, सत्यापन एवं अनुमोदन न हो जाए।

प्रमुख गैर-अनुरूपता सामान्यतः निम्नलिखित दो परिस्थितियों में उत्पन्न होती है—


(क) मानक की किसी प्रमुख आवश्यकता का अनुपालन न होना

(Failure to Meet a Key Requirement of the Standard)

यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब ISO/IEC 17020 की किसी मूलभूत (Fundamental) आवश्यकता का उल्लंघन किया जाता है।

ऐसी गैर-अनुरूपताएँ निरीक्षण निकाय की विश्वसनीयता, निष्पक्षता तथा तकनीकी क्षमता पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालती हैं।

उदाहरण

1. निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता

(Impartiality & Independence)

यदि यह प्रमाणित हो जाए कि—

  • निरीक्षण परिणाम किसी व्यावसायिक, वित्तीय अथवा प्रबंधकीय दबाव से प्रभावित हुए हैं।
  • Type B अथवा Type C निरीक्षण निकाय में निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त व्यवस्थाएँ उपलब्ध नहीं हैं।
  • हितों के टकराव (Conflict of Interest) की पहचान एवं नियंत्रण की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

तो इसे प्रमुख गैर-अनुरूपता माना जाएगा।


2. तकनीकी दक्षता

(Competence)

यदि कोई निरीक्षक आवश्यक योग्यता, प्रशिक्षण अथवा वैध प्रमाणन (Certification) के बिना जटिल निरीक्षण कार्य कर रहा है, जैसे—

  • Non-Destructive Testing (NDT)
  • Pressure Vessel Inspection
  • Welding Inspection
  • Electrical Safety Inspection

तो यह ISO/IEC 17020 की गंभीर अवहेलना मानी जाएगी।


3. निरीक्षण पद्धति

(Inspection Methodology)

यदि संस्था नियमित रूप से निर्धारित मानकों से भिन्न निरीक्षण विधि अपनाती है तथा—

  • उसका कोई तकनीकी औचित्य उपलब्ध नहीं है,
  • विधि का सत्यापन (Validation) नहीं किया गया है,
  • अथवा ग्राहक को इसकी जानकारी नहीं दी गई है,

तो यह प्रमुख गैर-अनुरूपता होगी।


4. उपकरणों का अंशांकन

(Equipment Calibration)

यदि कोई महत्वपूर्ण मापन उपकरण (Critical Measuring Instrument) निर्धारित अंशांकन अवधि समाप्त होने के बाद भी उपयोग में लिया जा रहा है, तो उस उपकरण से प्राप्त सभी निरीक्षण परिणाम संदिग्ध माने जाएंगे।

ऐसी स्थिति निरीक्षण निकाय की तकनीकी विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।


5. गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की अनुपस्थिति

यदि संस्था में निम्नलिखित में से कोई आवश्यक प्रक्रिया उपलब्ध ही नहीं है—

  • आंतरिक ऑडिट (Internal Audit)
  • प्रबंधन समीक्षा (Management Review)
  • ग्राहक शिकायत निवारण प्रक्रिया
  • दस्तावेज़ नियंत्रण प्रणाली
  • सुधारात्मक कार्यवाही प्रक्रिया

तो इसे गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की गंभीर विफलता माना जाएगा।


(ख) गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) की प्रभावशीलता का समाप्त होना

(Breakdown in the Effectiveness of the Quality Management System)

कभी-कभी किसी एक बड़ी त्रुटि के कारण नहीं, बल्कि अनेक संबंधित लघु गैर-अनुरूपताओं के कारण यह स्पष्ट हो जाता है कि पूरी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर रही है।

ऐसी स्थिति प्रमुख गैर-अनुरूपता मानी जाती है।

यदि QMS स्वयं त्रुटियों की पहचान करने एवं उन्हें सुधारने में असफल हो जाए, तो यह उसकी प्रणालीगत विफलता का प्रमाण है।


उदाहरण

1. अप्रभावी सुधारात्मक कार्यवाही

(Ineffective Corrective Action)

यदि एक ही प्रकार की गैर-अनुरूपता—

  • बार-बार आंतरिक ऑडिट में मिले,
  • पुनः बाहरी मूल्यांकन में भी मिले,
  • और संस्था उसका मूल कारण (Root Cause) पहचानने में असफल रहे,

तो यह दर्शाता है कि सुधारात्मक कार्यवाही प्रभावी नहीं है।


2. प्रक्रियाओं की जानकारी का अभाव

(Systemic Ignorance of Procedures)

यदि किसी विभाग के अधिकांश कर्मचारी—

  • निर्धारित प्रक्रिया से अनभिज्ञ हों,
  • कार्य निर्देशों का पालन न कर रहे हों,
  • अथवा विभिन्न कर्मचारी अलग-अलग तरीकों से निरीक्षण कर रहे हों,

तो यह प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण एवं संचार प्रणाली की विफलता को दर्शाता है।


3. आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की विफलता

(Failure of Internal Controls)

यदि संस्था का आंतरिक ऑडिट—

  • केवल औपचारिकता बनकर रह गया हो,
  • महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों को शामिल न करता हो,
  • या स्पष्ट गैर-अनुरूपताओं की पहचान करने में असफल रहा हो,

जबकि वही त्रुटियाँ SDAB के मूल्यांकनकर्ता आसानी से पहचान लेते हैं, तो यह गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की गंभीर कमजोरी मानी जाएगी।


मूल्यांकन निष्कर्षों का प्रबंधन एवं प्रभाव

(Management and Implications of Findings)

मूल्यांकन निष्कर्षों का वर्गीकरण ही यह निर्धारित करता है कि आगे कौन-सी कार्यवाही की जाएगी।

लघु गैर-अनुरूपता की स्थिति में

निरीक्षण निकाय को—

  • मूल कारण (Root Cause) का विश्लेषण करना होगा।
  • सुधारात्मक कार्यवाही लागू करनी होगी।
  • भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के उपाय अपनाने होंगे।
  • SDAB को आवश्यक दस्तावेज़ एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।

यदि SDAB सुधारों से संतुष्ट होता है, तो प्रत्यायन प्रक्रिया जारी रह सकती है।


प्रमुख गैर-अनुरूपता की स्थिति में

यदि प्रमुख गैर-अनुरूपता पाई जाती है, तो प्रत्यायन प्रक्रिया तत्काल आगे नहीं बढ़ेगी।

निरीक्षण निकाय को—

  • विस्तृत मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) करना होगा।
  • 5 Whys, Fishbone Diagram अथवा अन्य उपयुक्त तकनीकों का उपयोग करना होगा।
  • व्यापक सुधारात्मक एवं निवारक कार्यवाही लागू करनी होगी।
  • उनके प्रभावी क्रियान्वयन के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।

अधिकांश मामलों में SDAB द्वारा पुनः स्थल सत्यापन (Follow-up On-Site Assessment) अथवा दूरस्थ सत्यापन (Remote Verification) किया जाएगा।

संतोषजनक सत्यापन के बाद ही प्रत्यायन प्रदान किया जा सकता है।

यदि किसी पहले से प्रत्यायित निरीक्षण निकाय में निगरानी (Surveillance) के दौरान प्रमुख गैर-अनुरूपता पाई जाती है और उसका समयबद्ध समाधान नहीं किया जाता, तो SDAB आवश्यकतानुसार—

  • प्रत्यायन को निलंबित (Suspension) कर सकता है।
  • प्रत्यायन का दायरा (Scope) सीमित कर सकता है।
  • अथवा प्रत्यायन निरस्त (Withdrawal of Accreditation) कर सकता है।

सारांश

मूल्यांकन निष्कर्षों का वर्गीकरण केवल त्रुटियों की संख्या पर आधारित नहीं होता, बल्कि उनके जोखिम (Risk), प्रभाव (Impact), प्रणालीगत प्रकृति (Systemic Nature) तथा ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है।

इसी प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्यायन केवल उन निरीक्षण निकायों को प्रदान किया जाए जिनकी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रभावी, आत्म-सुधारात्मक (Self-Correcting), तकनीकी रूप से सक्षम तथा पूर्णतः विश्वसनीय हो।


6. सुधारात्मक कार्यवाही एवं अंतिम निर्णय

(Corrective Actions and Decision)

6.1 गैर-अनुरूपताओं का निवारण

(Addressing Non-Conformities)

स्थल मूल्यांकन पूर्ण होने के पश्चात SDAB द्वारा निरीक्षण निकाय को विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट (Assessment Report) प्रदान की जाती है। इस रिपोर्ट में मूल्यांकन के दौरान प्राप्त सभी अनुरूपताओं (Conformities), लघु गैर-अनुरूपताओं (Minor Non-Conformities) तथा प्रमुख गैर-अनुरूपताओं (Major Non-Conformities) का स्पष्ट विवरण होता है।

यदि किसी प्रकार की गैर-अनुरूपता पाई जाती है, तो निरीक्षण निकाय को SDAB द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action) की विस्तृत योजना प्रस्तुत करनी होगी।

सुधारात्मक कार्यवाही योजना में सामान्यतः निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित होने चाहिए—

  • गैर-अनुरूपता का विस्तृत विवरण।
  • मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis)।
  • प्रस्तावित सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action)।
  • पुनरावृत्ति रोकने हेतु निवारक उपाय (Preventive Actions)।
  • कार्यान्वयन की समय-सीमा।
  • उत्तरदायी अधिकारी का नाम।
  • कार्यान्वयन के वस्तुनिष्ठ प्रमाण (Objective Evidence)।

सुधारात्मक कार्यवाही का उद्देश्य केवल त्रुटि को दूर करना नहीं, बल्कि उसके वास्तविक कारण की पहचान कर भविष्य में उसी प्रकार की त्रुटि की पुनरावृत्ति को रोकना है।


6.2 सत्यापन एवं समापन

(Verification and Closure)

निरीक्षण निकाय द्वारा प्रस्तुत सुधारात्मक कार्यवाहियों का SDAB सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करता है।

लघु गैर-अनुरूपता की स्थिति में

यदि केवल लघु गैर-अनुरूपताएँ पाई गई हों, तो सामान्यतः प्रस्तुत दस्तावेज़ों एवं उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की समीक्षा के आधार पर ही उनका सत्यापन किया जा सकता है।

यदि SDAB प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होता है, तो संबंधित गैर-अनुरूपताओं को बंद (Closed) घोषित कर दिया जाता है।


प्रमुख गैर-अनुरूपता की स्थिति में

यदि प्रमुख गैर-अनुरूपता पाई गई हो, तो केवल दस्तावेज़ों की समीक्षा पर्याप्त नहीं मानी जाती।

ऐसी स्थिति में SDAB आवश्यकता अनुसार—

  • पुनः स्थल मूल्यांकन (Follow-up On-Site Assessment),
  • दूरस्थ सत्यापन (Remote Verification),
  • अथवा अतिरिक्त तकनीकी मूल्यांकन

कर सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सुधारात्मक कार्यवाही प्रभावी रूप से लागू की गई है तथा गैर-अनुरूपता का मूल कारण पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।


7. प्रत्यायन प्रदान करना एवं निगरानी

(Accreditation Grant and Surveillance)

7.1 प्रत्यायन प्रदान करना

(Grant of Accreditation)

जब—

  • स्थल मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाए,
  • सभी गैर-अनुरूपताओं का संतोषजनक समाधान हो जाए,
  • तथा मूल्यांकन समिति प्रस्तुत सभी साक्ष्यों से संतुष्ट हो जाए,

तब SDAB की प्रत्यायन समिति (Accreditation Committee) अंतिम निर्णय लेकर निरीक्षण निकाय को प्रत्यायन प्रदान करती है।

इसके उपरांत संस्था को प्रत्यायन प्रमाणपत्र (Certificate of Accreditation) जारी किया जाता है।

इस प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित विवरण अंकित होते हैं—

  • प्रत्यायित निरीक्षण निकाय का नाम।
  • प्रत्यायन प्रमाणपत्र संख्या।
  • प्रत्यायन का कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation)।
  • लागू मानक (ISO/IEC 17020)।
  • प्रत्यायन की वैधता अवधि।
  • SDAB की स्वीकृति एवं प्राधिकृत हस्ताक्षर।

प्रत्यायन केवल उसी कार्यक्षेत्र तक सीमित होता है जिसे SDAB द्वारा अनुमोदित एवं सत्यापित किया गया हो।


7.2 सार्वजनिक रजिस्टर

(Public Register – Transparency and Trust)

प्रत्यायन प्रदान किए जाने के पश्चात निरीक्षण निकाय का विवरण SDAB के सार्वजनिक रजिस्टर (Public Register) में प्रकाशित किया जाता है।

यह केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि पारदर्शिता (Transparency), विश्वसनीयता (Credibility) तथा सार्वजनिक विश्वास (Public Trust) सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

सार्वजनिक रजिस्टर में सामान्यतः निम्नलिखित विवरण उपलब्ध होते हैं—

  • निरीक्षण निकाय का कानूनी नाम।
  • कार्यालय का पता एवं संपर्क विवरण।
  • प्रत्यायन प्रमाणपत्र संख्या।
  • प्रत्यायन की वैधता अवधि।
  • अनुमोदित कार्यक्षेत्र (Approved Scope of Accreditation)।
  • निरीक्षण गतिविधियों का विवरण।
  • लागू मानक (ISO/IEC 17020:2012)।
  • आवश्यकतानुसार शाखा कार्यालयों का विवरण।

सार्वजनिक रजिस्टर का उद्देश्य

सार्वजनिक रजिस्टर निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करता है—

ग्राहकों के लिए सत्यापन का माध्यम

कोई भी संभावित ग्राहक स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित कर सकता है कि संबंधित निरीक्षण निकाय वास्तव में SDAB द्वारा प्रत्यायित है तथा उसका प्रत्यायन किस कार्यक्षेत्र के लिए मान्य है।


नियामक संस्थाओं के लिए संदर्भ

सरकारी विभाग, नियामक संस्थाएँ एवं अन्य विनिर्देशक (Specifiers) आवश्यकता पड़ने पर SDAB के सार्वजनिक रजिस्टर का उपयोग कर किसी निरीक्षण निकाय की प्रत्यायन स्थिति का सत्यापन कर सकते हैं।


बाज़ार में विश्वसनीयता

सार्वजनिक रजिस्टर में सूचीबद्ध होना निरीक्षण निकाय की प्रतिष्ठा को बढ़ाता है तथा यह दर्शाता है कि संस्था स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन के उपरांत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाई गई है।


“पूर्व सूचना के बिना अद्यतन”

(Updated Without Prior Warning)

SDAB की सार्वजनिक सूची को बिना पूर्व सूचना के अद्यतन (Update) करने की नीति प्रत्यायन प्रणाली की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने हेतु अपनाई जाती है।

इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक रजिस्टर सदैव वास्तविक एवं अद्यतन स्थिति को प्रदर्शित करे।

यदि किसी निरीक्षण निकाय का—

  • प्रत्यायन निलंबित (Suspended),
  • सीमित (Reduced Scope),
  • अथवा निरस्त (Withdrawn)

किया जाता है, तो उसका विवरण बिना किसी विलंब के सार्वजनिक रजिस्टर में संशोधित कर दिया जाता है।

इसी प्रकार—

  • नया प्रत्यायन,
  • कार्यक्षेत्र का विस्तार,
  • अथवा अन्य स्वीकृत परिवर्तन

भी तत्काल सार्वजनिक रजिस्टर में प्रदर्शित किए जाते हैं।

हालाँकि सूची अद्यतन करने से पूर्व सार्वजनिक घोषणा नहीं की जाती, परन्तु संबंधित निरीक्षण निकाय को आधिकारिक पत्र, ई-मेल अथवा SDAB पोर्टल के माध्यम से आवश्यक सूचना उपलब्ध करा दी जाती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य SDAB के प्रत्यायन चिन्ह (Accreditation Mark) की विश्वसनीयता एवं सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना है।


7.3 सतत निगरानी

(Ongoing Surveillance)

प्रत्यायन एक बार प्रदान कर देने के बाद समाप्त नहीं हो जाता।

यह एक निरंतर निगरानी (Continuous Surveillance) पर आधारित प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्यायित निरीक्षण निकाय भविष्य में भी ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं का निरंतर पालन करता रहे।

SDAB सामान्यतः—

  • वार्षिक निगरानी मूल्यांकन (Annual Surveillance Assessment),
  • तथा निर्धारित अंतराल (आमतौर पर प्रत्येक चार वर्ष) पर पूर्ण पुनर्मूल्यांकन (Reassessment)

संपन्न करता है।

प्रत्यायित निरीक्षण निकाय का यह दायित्व होगा कि वह SDAB को समय पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तनों की सूचना दे—

  • प्रबंधन में परिवर्तन।
  • संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन।
  • कार्यक्षेत्र (Scope) में परिवर्तन।
  • कार्यालय अथवा प्रयोगशाला का स्थान परिवर्तन।
  • प्रमुख तकनीकी कर्मचारियों में परिवर्तन।
  • निरीक्षण विधियों में परिवर्तन।
  • अन्य कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन जो प्रत्यायन को प्रभावित कर सकता हो।

आवश्यकता अनुसार निरीक्षण निकाय को प्रवीणता परीक्षण (Proficiency Testing), अंतर-प्रयोगशाला तुलना (Inter-Laboratory Comparison) अथवा अन्य तकनीकी सत्यापन कार्यक्रमों में भी भाग लेना होगा।


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