सनातन धर्म बोर्ड

निरीक्षण निकाय प्रत्यायन की संक्षिप्त प्रक्रिया

1) आवेदन

निरीक्षण निकाय (Inspection Body) निर्धारित आवेदन प्रपत्र में आवश्यक आवेदन शुल्क के साथ प्रत्यायन (Accreditation) हेतु औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करेगा।

2) मानकों का अनुपालन

आवेदक निरीक्षण निकाय को ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं का अनुपालन करना होगा तथा ISO 9001 (नवीनतम संस्करण) अथवा अपने स्वयं के ऐसे गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS) को बनाए रखना होगा, जो कम-से-कम ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करती हो।

3) दस्तावेज़ों का प्रस्तुतिकरण

आवेदक निरीक्षण निकाय अपने संचालन से संबंधित सभी आवश्यक मैनुअल एवं प्रक्रियाएँ (Manuals & Procedures) SDAB को प्रस्तुत करेगा। इनमें निम्नलिखित शामिल होना चाहिए—

(a) निरीक्षण निकाय की श्रेणी Type A, Type B अथवा Type C के संबंध में विवरण तथा निष्पक्षता (Impartiality) एवं गोपनीयता (Confidentiality) सुनिश्चित करने हेतु अपनाई गई व्यवस्थाएँ।

(b) निरीक्षण के प्रकार, जैसे—

  • डिज़ाइन निरीक्षण (Design Inspection)
  • प्रदर्शन सत्यापन (Demonstration)
  • मूल्यांकन (Assessment)
  • भौतिक परीक्षण (Physical Testing)

तथा उनसे संबंधित प्रक्रियाएँ एवं कार्य निर्देश (Procedures & Guidelines)।

(c) निरीक्षण निकाय एवं उसके ग्राहकों के मध्य अनुबंध की शर्तें (Contract Agreements) तथा सामान्य अनुबंध प्रावधान (Standard Clauses)।

4) दस्तावेज़ समीक्षा

SDAB प्रस्तुत दस्तावेज़ों का विस्तृत मूल्यांकन करेगा। यदि किसी प्रकार के संशोधन या स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी, तो आवेदक को आवश्यक सुधार कर पुनः दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।

5) स्थल मूल्यांकन (Site Assessment)

आवश्यकता होने पर SDAB आवेदक के परिसर का स्थल निरीक्षण (On-site Assessment) करेगा।

6) प्रत्यायन प्रदान करना

यदि स्थल निरीक्षण सफल रहता है तथा सभी आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाइयाँ (Corrective Actions) संतोषजनक रूप से पूर्ण कर ली जाती हैं, तो आवेदक को प्रत्यायन प्रदान किया जाएगा। इसके उपरांत निरीक्षण निकाय का नाम SDAB की आधिकारिक वेबसाइट पर सूचीबद्ध किया जाएगा।


1. परिचय (Introduction)

प्रत्यायन (Accreditation) एक औपचारिक तृतीय-पक्ष (Third Party) मान्यता है, जो यह प्रमाणित करती है कि कोई निरीक्षण निकाय विशिष्ट निरीक्षण कार्यों को दक्षतापूर्वक संपन्न करने में सक्षम है।

यह नियामक संस्थाओं, उद्योगों तथा आम जनता को यह विश्वास प्रदान करता है कि संबंधित निरीक्षण निष्पक्ष, विश्वसनीय तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किए गए हैं।

यह संक्षिप्त प्रक्रिया उन प्रमुख चरणों का वर्णन करती है, जिनका पालन करके कोई निरीक्षण निकाय SDAB (Sanatan Dharma Accreditation Board) से प्रत्यायन प्राप्त कर सकता है।

इस प्रक्रिया को अत्यंत कठोर एवं व्यवस्थित बनाया गया है ताकि प्रत्यायन की विश्वसनीयता, निष्पक्षता तथा गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।


2. प्रारंभिक आवेदन एवं प्रतिबद्धता (Initial Application and Commitment)

2.1 औपचारिक आवेदन (Formal Application)

प्रत्यायन प्राप्त करने के इच्छुक निरीक्षण निकाय को SDAB के निर्धारित आवेदन प्रपत्र में औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करना होगा।

इस आवेदन के साथ निर्धारित, अप्रत्यावर्तनीय (Non-refundable) आवेदन शुल्क भी जमा करना आवश्यक होगा।

आवेदन में सामान्यतः निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित होगी—

  • संगठन की कानूनी स्थिति (Legal Status)
  • स्वामित्व संरचना (Ownership Structure)
  • प्रत्यायन हेतु प्रस्तावित निरीक्षण कार्यों का दायरा (Scope of Inspection)
  • संचालन के स्थान (Locations of Operation)

2.2 अनुरूपता की घोषणा (Declaration of Conformity)

आवेदन प्रस्तुत करते समय निरीक्षण निकाय को यह घोषणा करनी होगी कि वह ISO/IEC 17020:2012 (Conformity Assessment – Requirements for the Operation of Various Types of Bodies Performing Inspection) की सभी आवश्यकताओं का पूर्ण अनुपालन करेगा।

यह मानक विश्व स्तर पर निरीक्षण निकायों के प्रत्यायन हेतु स्वीकृत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है।


2.3 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS)

आवेदक निरीक्षण निकाय को एक प्रलेखित (Documented) गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) स्थापित एवं बनाए रखना आवश्यक होगा।

यह प्रणाली ISO 9001 (नवीनतम संस्करण) पर आधारित हो सकती है, किन्तु न्यूनतम रूप से इसमें ISO/IEC 17020 की सभी प्रबंधन संबंधी आवश्यकताओं का समावेश होना अनिवार्य है।

अनेक निरीक्षण निकाय अपने प्रबंधन तंत्र में ISO 9001 तथा ISO/IEC 17020 दोनों की आवश्यकताओं को एकीकृत (Integrated Management System) रूप में लागू करते हैं, जिससे गुणवत्ता एवं तकनीकी दक्षता दोनों सुनिश्चित होती हैं।

3. दस्तावेज़ प्रस्तुतिकरण एवं प्रारंभिक मूल्यांकन (Documentation Submission and Preliminary Evaluation)

3.1 आवश्यक दस्तावेज़ों का प्रस्तुतिकरण (Submission of Key Documents)

आवेदक निरीक्षण निकाय को समीक्षा हेतु SDAB के समक्ष अपने प्रबंधन एवं तकनीकी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे। यह दस्तावेज़ीकरण प्रत्यायन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होता है तथा आगामी मूल्यांकन इसी पर आधारित होता है।

इन दस्तावेज़ों में निम्नलिखित शामिल होना आवश्यक है—


3.1.1 गुणवत्ता मैनुअल एवं प्रबंधन प्रक्रियाएँ (Quality Manual and Management Procedures)

आवेदक को अपना Quality Manual प्रस्तुत करना होगा, जिसमें गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS) की संरचना, नीतियाँ तथा प्रक्रियाएँ स्पष्ट रूप से वर्णित हों।

इस दस्तावेज़ में यह दर्शाया जाना चाहिए कि संगठन किस प्रकार ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं का पालन करता है तथा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी रूप से संचालित करता है।


3.1.2 निष्पक्षता एवं गोपनीयता संबंधी घोषणा (Statement on Impartiality and Confidentiality)

निरीक्षण निकाय को यह स्पष्ट रूप से घोषित करना होगा कि वह किस श्रेणी (Type) का निरीक्षण निकाय है।

Type A Inspection Body

यह ऐसा निरीक्षण निकाय होता है जो निरीक्षण किए जाने वाले उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा से पूर्णतः स्वतंत्र होता है तथा किसी भी प्रकार के व्यावसायिक, वित्तीय अथवा अन्य बाहरी दबाव से मुक्त रहकर निष्पक्ष निर्णय लेता है।

Type B Inspection Body

यह किसी बड़े संगठन का पृथक एवं पहचान योग्य भाग होता है, जो उसी संगठन के लिए अथवा सीमित बाहरी ग्राहकों के लिए निरीक्षण सेवाएँ प्रदान करता है। यद्यपि यह मूल संगठन का हिस्सा होता है, फिर भी इसकी निष्पक्षता बनाए रखने हेतु स्वतंत्र व्यवस्थाएँ लागू की जाती हैं।

Type C Inspection Body

यह भी किसी बड़े संगठन का भाग होता है, जो निरीक्षण के अतिरिक्त डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना अथवा रखरखाव जैसी गतिविधियों में भी संलग्न हो सकता है।

इस प्रकार के निरीक्षण निकाय को यह सिद्ध करना आवश्यक होता है कि निरीक्षण संबंधी निर्णय किसी भी व्यावसायिक हित से प्रभावित नहीं होंगे।


आवेदक को यह भी स्पष्ट रूप से बताना होगा कि—

  • संगठनात्मक संरचना (Organizational Structure)
  • प्रबंधन की प्रतिबद्धता (Management Commitment)
  • गोपनीयता समझौते (Confidentiality Agreements)
  • हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने हेतु अपनाई गई व्यवस्थाएँ

कैसे निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित करती हैं।


3.1.3 प्रत्यायन का कार्यक्षेत्र एवं तकनीकी प्रक्रियाएँ (Scope of Accreditation and Technical Procedures)

आवेदक को उन सभी निरीक्षण गतिविधियों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करना होगा जिनके लिए प्रत्यायन प्राप्त करना चाहता है।

उदाहरण—

  • डिज़ाइन समीक्षा (Design Review)
  • उत्पाद सत्यापन (Product Verification)
  • सेवा अवधि निरीक्षण (In-service Inspection)
  • नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT)
  • आयामी निरीक्षण (Dimensional Inspection)

प्रत्येक गतिविधि के लिए निम्नलिखित दस्तावेज़ उपलब्ध कराना आवश्यक होगा—

  • तकनीकी प्रक्रियाएँ (Technical Procedures)
  • कार्य निर्देश (Work Instructions)
  • निरीक्षण पद्धति (Inspection Method)
  • लागू मानक एवं विनिर्देश (Applicable Standards & Specifications)

ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निरीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा।


3.1.4 अनुबंध संबंधी दस्तावेज़ (Contractual Agreements)

आवेदक को अपने ग्राहकों के साथ किए जाने वाले अनुबंधों (Contracts) अथवा मानक नियम एवं शर्तों (Terms & Conditions) की प्रतिलिपि प्रस्तुत करनी होगी।

इन अनुबंधों में निम्नलिखित विषय स्पष्ट रूप से सम्मिलित होने चाहिए—

  • निरीक्षण सेवा का कार्यक्षेत्र
  • ग्राहक एवं निरीक्षण निकाय की जिम्मेदारियाँ
  • गोपनीयता संबंधी प्रावधान
  • निष्पक्षता बनाए रखने की व्यवस्था
  • निरीक्षण रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया
  • विवाद समाधान (Dispute Resolution) संबंधी प्रावधान

4. दस्तावेज़ समीक्षा चरण (Document Review Stage)

4.1 दस्तावेज़ समीक्षा (Conduct of Review)

SDAB एक Lead Assessor तथा आवश्यकता होने पर संबंधित क्षेत्र के Technical Expert को नियुक्त करेगा।

ये विशेषज्ञ प्रस्तुत दस्तावेज़ों की विस्तृत डेस्क समीक्षा (Desk Assessment) करेंगे।

इस समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि—

  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली पूर्ण रूप से प्रलेखित है।
  • दस्तावेज़ ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • तकनीकी प्रक्रियाएँ पर्याप्त एवं उपयुक्त हैं।
  • निरीक्षण गतिविधियाँ संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालित की जा सकती हैं।

4.2 टिप्पणियाँ एवं आवश्यक सुधार (Feedback and Correction)

यदि समीक्षा के दौरान कोई कमी (Deficiency) अथवा असंगति (Non-conformity) पाई जाती है, तो SDAB आवेदक को एक औपचारिक Document Review Report जारी करेगा।

इस रिपोर्ट में—

  • सभी कमियों का विवरण
  • आवश्यक सुधार
  • स्पष्टीकरण
  • अतिरिक्त दस्तावेज़ों की आवश्यकता

स्पष्ट रूप से उल्लेखित होगा।

आवेदक को—

  • आवश्यक संशोधन करना होगा,
  • संशोधित दस्तावेज़ पुनः प्रस्तुत करने होंगे,
  • तथा प्रत्येक टिप्पणी का लिखित उत्तर देना होगा।

सभी प्रमुख टिप्पणियों का संतोषजनक समाधान होने के पश्चात ही अगला चरण प्रारंभ किया जाएगा।


5. स्थल मूल्यांकन (On-Site Assessment)

5.1 योजना एवं निष्पादन (Planning and Execution)

जब दस्तावेज़ समीक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाती है, तब SDAB आवेदक के कार्यालय, प्रयोगशाला अथवा निरीक्षण स्थल पर On-site Assessment आयोजित करता है।

इसका उद्देश्य यह सत्यापित करना होता है कि दस्तावेज़ों में वर्णित गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली वास्तव में प्रभावी रूप से लागू एवं संचालित की जा रही है।

मूल्यांकन टीम निम्नलिखित गतिविधियाँ करती है—

  • शीर्ष प्रबंधन एवं कर्मचारियों का साक्षात्कार (Interviews)
  • वास्तविक निरीक्षण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन (Witness Assessment)
  • निरीक्षण अभिलेखों (Inspection Records) की समीक्षा
  • अंशांकन प्रमाणपत्र (Calibration Certificates) की जाँच
  • प्रशिक्षण अभिलेख (Training Records) का सत्यापन
  • आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट (Internal Audit Reports) का परीक्षण
  • प्रबंधन समीक्षा अभिलेख (Management Review Records) की जाँच
  • उपकरणों एवं सुविधाओं का निरीक्षण
  • तकनीकी दक्षता का मूल्यांकन
  • प्रक्रियाओं के वास्तविक अनुपालन की पुष्टि

5.2 मूल्यांकन के उद्देश्य (Objectives of On-Site Assessment)

स्थल मूल्यांकन का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित बातों की पुष्टि करना है—

  • दस्तावेज़ों में वर्णित प्रक्रियाएँ वास्तव में लागू हैं।
  • निरीक्षक (Inspectors) आवश्यक योग्यता एवं दक्षता रखते हैं।
  • सभी उपकरण उचित रूप से अंशांकित (Calibrated) हैं।
  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।
  • निरीक्षण गतिविधियाँ निष्पक्ष एवं तकनीकी रूप से सक्षम तरीके से संचालित की जा रही हैं।
  • ग्राहकों की जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है।
  • ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं का व्यावहारिक रूप से पालन किया जा रहा है।

5.2 मूल्यांकन निष्कर्ष (Assessment Findings): वर्गीकरण, प्रभाव एवं प्रबंधन

स्थल मूल्यांकन (On-site Assessment) प्रत्यायन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस चरण में मूल्यांकनकर्ता (Assessors) यह सत्यापित करते हैं कि संगठन द्वारा दस्तावेज़ों में वर्णित गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS) वास्तव में प्रभावी रूप से लागू है या नहीं।

इस मूल्यांकन का परिणाम Assessment Findings (मूल्यांकन निष्कर्ष) के रूप में दर्ज किया जाता है।

इन निष्कर्षों को सामान्यतः तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है—

  1. अनुरूपता (Conformity)
  2. लघु असंगति (Minor Non-Conformity)
  3. गंभीर असंगति (Major Non-Conformity)

यह वर्गीकरण प्रत्यायन संबंधी अंतिम निर्णय का आधार होता है तथा इसी के अनुसार सुधारात्मक कार्यवाहियाँ निर्धारित की जाती हैं।


1. अनुरूपता (Conformity)

अनुरूपता (Conformity) वह स्थिति है जिसमें यह प्रमाणित होता है कि निरीक्षण निकाय ISO/IEC 17020 अथवा अन्य लागू मानकों की आवश्यकताओं का सफलतापूर्वक पालन कर रहा है।

मूल्यांकनकर्ता ऐसी अनुरूपताओं को दर्ज करते हैं ताकि संगठन की अच्छी कार्यप्रणालियों (Good Practices) का दस्तावेजीकरण किया जा सके।

यद्यपि अनुरूपताओं पर किसी सुधारात्मक कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी इन्हें दर्ज करना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि—

  • यह गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन की पुष्टि करता है।
  • संगठन के कर्मचारियों एवं प्रबंधन को सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त होती है।
  • भविष्य के मूल्यांकन हेतु उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Benchmark) स्थापित होती है।
  • संगठन की तकनीकी क्षमता एवं विश्वसनीयता प्रमाणित होती है।

2. लघु असंगति (Minor Non-Conformity)

लघु असंगति वह स्थिति होती है जिसमें किसी मानक की आवश्यकता का सीमित स्तर पर उल्लंघन हुआ हो, किन्तु उसका संगठन की समग्र तकनीकी क्षमता अथवा निरीक्षण परिणामों की विश्वसनीयता पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव न पड़ा हो।

यह सामान्यतः किसी एकल घटना (Isolated Incident) अथवा मानवीय त्रुटि (Human Error) का परिणाम होती है।

ऐसी असंगति यह संकेत नहीं देती कि पूरी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली विफल हो चुकी है।


लघु असंगति की प्रमुख विशेषताएँ

1. एकल घटना (Isolated Incident)

त्रुटि केवल किसी एक विशेष मामले तक सीमित होती है।

उदाहरण—

  • किसी निरीक्षण प्रपत्र (Inspection Form) में एक हस्ताक्षर छूट जाना।
  • किसी एक कर्मचारी की प्रशिक्षण फ़ाइल में प्रमाण-पत्र संलग्न न होना।
  • किसी उपकरण की कैलिब्रेशन रिपोर्ट गलत फ़ाइल में रखी जाना।

2. प्रणालीगत प्रभाव का अभाव (Limited Systemic Impact)

यह त्रुटि यह नहीं दर्शाती कि संबंधित प्रक्रिया गलत है।

प्रक्रिया सामान्यतः सही प्रकार से लागू की जा रही होती है, केवल किसी एक अवसर पर उसका पालन नहीं हुआ।


3. निरीक्षण परिणामों पर प्रभाव नहीं

मूल्यांकनकर्ता यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि इस त्रुटि का—

  • निरीक्षण रिपोर्ट
  • मापन परिणाम
  • निरीक्षण निष्कर्ष
  • ग्राहक को जारी प्रमाण

की विश्वसनीयता पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा।

निरीक्षण निकाय प्रत्यायन की संक्षिप्त प्रक्रिया. 
A professional flowchart infographic titled in Hindi and English, detailing the 8-step accreditation process for an Inspection Body. The process flows from a top central step to a final bottom step, using blue rounded rectangular nodes, white icons, and connecting arrows. Steps include: 1. Application Submission, 2. Documentation Review, 3. Pre-Assessment (Optional), 4. Initial Assessment, 5. Corrective Action (if non-conformity exists), 6. Assessment Report Review, 7. Decision, and 8. Certificate Issuance. The visual design is clean and uses a corporate blue and white color scheme.

लघु असंगति के उदाहरण

  • निरीक्षक के प्रशिक्षण अभिलेख पर दक्षता मूल्यांकनकर्ता (Competency Assessor) के हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है।
  • किसी संदर्भ मानक (Reference Standard) की कैलिब्रेशन वैध है, किन्तु उस पर लगा पहचान स्टिकर हट गया है।
  • उपकरण सूची (Equipment Inventory) में दर्ज एक गैर-महत्वपूर्ण उपकरण पिछली आंतरिक ऑडिट में जाँचा नहीं गया।
  • किसी निरीक्षण रिपोर्ट में टाइपिंग संबंधी त्रुटि पाई गई, जबकि तकनीकी निष्कर्ष सही हैं।

3. गंभीर असंगति (Major Non-Conformity)

गंभीर असंगति (Major Non-Conformity) अत्यंत गंभीर प्रकार की कमी होती है।

यह दर्शाती है कि—

  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का कोई महत्वपूर्ण भाग विफल हो गया है,
  • अथवा निरीक्षण निकाय की तकनीकी क्षमता, निष्पक्षता या विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो गया है।

गंभीर असंगति पाए जाने पर सामान्यतः प्रत्यायन प्रक्रिया तब तक आगे नहीं बढ़ती जब तक उसका प्रभावी समाधान एवं सत्यापन नहीं हो जाता।


गंभीर असंगति उत्पन्न होने की प्रमुख परिस्थितियाँ

(क) मानक की किसी महत्वपूर्ण आवश्यकता का उल्लंघन

जब ISO/IEC 17020 की किसी मूलभूत आवश्यकता का पालन नहीं किया जाता।

उदाहरण—

निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता (Impartiality & Independence)

  • निरीक्षण परिणाम किसी व्यावसायिक या वित्तीय दबाव से प्रभावित होना।
  • हितों के टकराव (Conflict of Interest) का उचित प्रबंधन न होना।
  • Type B अथवा Type C निरीक्षण निकायों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त व्यवस्था न होना।

तकनीकी क्षमता (Competence)

  • किसी निरीक्षक द्वारा आवश्यक योग्यता अथवा वैध प्रमाणन के बिना जटिल Non-Destructive Testing (NDT) करना।
  • अयोग्य कर्मचारी द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट जारी करना।

निरीक्षण पद्धति (Methodology)

  • निर्धारित मानक से भिन्न निरीक्षण प्रक्रिया अपनाना।
  • ग्राहक को सूचित किए बिना निरीक्षण पद्धति में परिवर्तन करना।
  • बिना किसी वैध तकनीकी आधार के निरीक्षण करना।

उपकरण (Equipment)

  • ऐसा मापन उपकरण प्रयोग करना जिसकी कैलिब्रेशन अवधि समाप्त हो चुकी हो।
  • दोषपूर्ण उपकरण से निरीक्षण करना।
  • कैलिब्रेशन अभिलेख उपलब्ध न होना।

ऐसी स्थिति में उस उपकरण से प्राप्त सभी मापन परिणाम संदिग्ध माने जा सकते हैं।


गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की विफलता

उदाहरण—

  • आंतरिक ऑडिट कार्यक्रम का पूर्ण अभाव।
  • प्रबंधन समीक्षा (Management Review) न करना।
  • ग्राहक शिकायतों के निस्तारण की कोई प्रक्रिया न होना।
  • दस्तावेज़ नियंत्रण प्रणाली (Document Control System) लागू न होना।

(ख) गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) की प्रभावशीलता में विफलता

जब पूरी गुणवत्ता प्रणाली ही त्रुटियों को रोकने या पहचानने में असफल हो जाती है।

यदि एक ही प्रकार की कई लघु असंगतियाँ लगातार पाई जाती हैं, तो उन्हें मिलाकर एक गंभीर असंगति माना जा सकता है।


उदाहरण

अप्रभावी सुधारात्मक कार्यवाही

यदि एक ही प्रकार की दस्तावेज़ नियंत्रण संबंधी त्रुटियाँ कई ऑडिट में लगातार मिलती रहें, तो यह दर्शाता है कि मूल कारण (Root Cause) का समाधान नहीं किया गया।


प्रक्रियाओं की जानकारी का अभाव

यदि कई कर्मचारी किसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया से अनभिज्ञ पाए जाते हैं, तो यह प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण अथवा संचार प्रणाली की विफलता को दर्शाता है।


आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की विफलता

यदि आंतरिक ऑडिट—

  • महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों का मूल्यांकन नहीं करता,
  • स्पष्ट त्रुटियों को पहचानने में असफल रहता है,
  • अथवा केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है,

तो यह गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की गंभीर कमजोरी मानी जाएगी।


मूल्यांकन निष्कर्षों का प्रबंधन (Management of Assessment Findings)

मूल्यांकन निष्कर्षों का वर्गीकरण यह निर्धारित करता है कि आगे की कार्यवाही किस प्रकार होगी।

लघु असंगतियों के लिए

निरीक्षण निकाय को—

  • मूल कारण (Root Cause) की पहचान करनी होगी।
  • त्रुटि का सुधार करना होगा।
  • भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने हेतु सुधारात्मक कार्यवाही लागू करनी होगी।
  • उसके प्रमाण SDAB को प्रस्तुत करने होंगे।

संतोषजनक प्रमाण प्राप्त होने पर प्रत्यायन प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।


गंभीर असंगतियों के लिए

यदि गंभीर असंगति पाई जाती है, तो प्रत्यायन प्रक्रिया तत्काल रोक दी जाती है।

निरीक्षण निकाय को—

  • विस्तृत Root Cause Analysis करना होगा।
  • 5 Why Analysis, Fishbone Diagram अथवा अन्य स्वीकृत तकनीकों का उपयोग करना होगा।
  • व्यापक सुधारात्मक एवं निवारक कार्यवाहियाँ (Corrective & Preventive Actions) लागू करनी होंगी।
  • उनके प्रभावी क्रियान्वयन के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

अधिकांश मामलों में SDAB पुनः स्थल मूल्यांकन (Follow-up On-site Assessment) करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी गंभीर असंगतियों का प्रभावी समाधान हो चुका है।

यदि निगरानी (Surveillance) के दौरान गंभीर असंगतियाँ पाई जाती हैं और समय पर उनका समाधान नहीं किया जाता, तो प्रत्यायन निलंबित (Suspended) अथवा रद्द (Withdrawn) किया जा सकता है।


सारांश (Summary)

मूल्यांकन निष्कर्षों का वर्गीकरण साक्ष्यों, जोखिम स्तर तथा ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है।

इसी प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्यायित (Accredited) निरीक्षण निकाय केवल प्रलेखित गुणवत्ता प्रणाली ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी सक्षम, निष्पक्ष, विश्वसनीय तथा आत्म-सुधार करने वाली संस्था हो।

6. सुधारात्मक कार्यवाही एवं प्रत्यायन निर्णय (Corrective Actions and Accreditation Decision)

6.1 असंगतियों का निराकरण (Addressing Non-Conformities)

स्थल मूल्यांकन पूर्ण होने के पश्चात SDAB निरीक्षण निकाय को एक विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट (Assessment Report) प्रदान करता है, जिसमें सभी अनुरूपताओं (Conformities), लघु असंगतियों (Minor Non-Conformities) तथा गंभीर असंगतियों (Major Non-Conformities) का उल्लेख होता है।

यदि कोई असंगति पाई जाती है, तो निरीक्षण निकाय को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action Plan) प्रस्तुत करनी होगी।

इस योजना में निम्नलिखित शामिल होना आवश्यक है—

  • असंगति का स्पष्ट विवरण
  • मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis)
  • सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action)
  • पुनरावृत्ति रोकने हेतु निवारक उपाय (Preventive Action)
  • कार्यान्वयन की समय-सीमा
  • कार्य पूर्ण होने के प्रमाण (Objective Evidence)

सुधारात्मक कार्यवाही केवल तत्काल समस्या का समाधान नहीं करती, बल्कि भविष्य में उसी प्रकार की त्रुटियों की पुनरावृत्ति को भी रोकती है।


6.2 सत्यापन एवं समापन (Verification and Closure)

निरीक्षण निकाय द्वारा प्रस्तुत सुधारात्मक कार्यवाहियों का SDAB द्वारा विस्तृत परीक्षण किया जाता है।

लघु असंगतियों (Minor Non-Conformities) के लिए

यदि प्रस्तुत दस्तावेज़ एवं प्रमाण संतोषजनक हों, तो केवल दस्तावेज़ों की समीक्षा के आधार पर ही असंगति को बंद (Closed) किया जा सकता है।


गंभीर असंगतियों (Major Non-Conformities) के लिए

गंभीर असंगतियों के मामलों में केवल दस्तावेज़ पर्याप्त नहीं होते।

ऐसी स्थिति में SDAB निम्न में से एक या अधिक कार्यवाही कर सकता है—

  • पुनः स्थल निरीक्षण (Follow-up On-site Assessment)
  • दूरस्थ सत्यापन (Remote Verification)
  • अतिरिक्त दस्तावेज़ों की समीक्षा
  • तकनीकी विशेषज्ञ द्वारा पुनर्मूल्यांकन

जब तक सभी गंभीर असंगतियों का प्रभावी समाधान सत्यापित नहीं हो जाता, तब तक प्रत्यायन प्रदान नहीं किया जाता।


7. प्रत्यायन प्रदान करना एवं निगरानी (Accreditation Grant and Surveillance)

7.1 प्रत्यायन प्रदान करना (Grant of Accreditation)

यदि—

  • दस्तावेज़ समीक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण हो,
  • स्थल मूल्यांकन संतोषजनक रहे,
  • तथा सभी असंगतियों का समुचित समाधान कर दिया गया हो,

तो SDAB Accreditation Committee अंतिम निर्णय लेकर निरीक्षण निकाय को प्रत्यायन प्रदान करती है।

सफल आवेदक को एक प्रत्यायन प्रमाण-पत्र (Certificate of Accreditation) जारी किया जाता है, जिसमें उसके अनुमोदित कार्यक्षेत्र (Approved Scope of Accreditation) का स्पष्ट उल्लेख होता है।

यह प्रमाण-पत्र इस बात का आधिकारिक प्रमाण होता है कि संबंधित निरीक्षण निकाय निर्धारित कार्यक्षेत्र में ISO/IEC 17020 के अनुरूप कार्य करने के लिए सक्षम एवं प्रत्यायित है।


7.2 सार्वजनिक रजिस्टर (Public Register): पारदर्शिता एवं विश्वास का आधार

किसी निरीक्षण निकाय का नाम SDAB के सार्वजनिक रजिस्टर (Public Register) में प्रकाशित किया जाना प्रत्यायन प्रक्रिया का अंतिम सार्वजनिक चरण होता है।

यह केवल औपचारिक सूचना नहीं होती, बल्कि यह बाजार, नियामक संस्थाओं तथा ग्राहकों के लिए संगठन की तकनीकी क्षमता का आधिकारिक प्रमाण होती है।


सार्वजनिक सूची (Listing) में सामान्यतः निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित होती है—

  • प्रत्यायित निरीक्षण निकाय का विधिक नाम (Legal Name)
  • कार्यालय का पता एवं संपर्क विवरण
  • प्रत्यायन प्रमाण-पत्र संख्या (Accreditation Certificate Number)
  • प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि
  • स्वीकृत कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation)
  • लागू मानक (जैसे ISO/IEC 17020:2012)
  • यदि लागू हो तो निरीक्षण स्थल अथवा शाखाओं का विवरण

सार्वजनिक रजिस्टर का उद्देश्य

यह रजिस्टर अनेक महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति करता है।

1. ग्राहकों के लिए सत्यापन का साधन

कोई भी संभावित ग्राहक यह सत्यापित कर सकता है कि—

  • निरीक्षण निकाय वास्तव में प्रत्यायित है या नहीं।
  • उसका प्रत्यायन वर्तमान में वैध है या नहीं।
  • वह किन-किन निरीक्षण सेवाओं के लिए अधिकृत है।

2. नियामक संस्थाओं के लिए संदर्भ

सरकारी विभाग, नियामक एजेंसियाँ तथा अन्य विनिर्देशक (Specifiers) केवल प्रत्यायित निरीक्षण निकायों की सेवाएँ लेने हेतु सार्वजनिक रजिस्टर का उपयोग कर सकते हैं।


3. बाज़ार में विश्वसनीयता

सार्वजनिक सूची में नाम प्रकाशित होने से—

  • संगठन की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
  • नए ग्राहकों का विश्वास प्राप्त होता है।
  • अंतरराष्ट्रीय एवं सरकारी परियोजनाओं में भाग लेने की पात्रता बढ़ती है।
  • गैर-प्रत्यायित प्रतिस्पर्धियों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होता है।

“पूर्व सूचना के बिना अद्यतन” (Updated Without Prior Warning): सत्यनिष्ठा का सिद्धांत

SDAB सार्वजनिक रजिस्टर को बिना पूर्व सूचना के अद्यतन (Update) कर सकता है।

इस नीति का उद्देश्य प्रत्यायन प्रणाली की निष्पक्षता, विश्वसनीयता तथा पारदर्शिता बनाए रखना है।

यदि किसी संगठन का प्रत्यायन—

  • निलंबित (Suspended)
  • वापस लिया गया (Withdrawn)
  • सीमित (Reduced Scope)
  • विस्तारित (Extended Scope)

किया जाता है, तो यह परिवर्तन सार्वजनिक रजिस्टर में तत्काल प्रभाव से प्रदर्शित किया जा सकता है।


इस नीति के प्रमुख लाभ

  • कोई संगठन निलंबन की अवधि में स्वयं को प्रत्यायित होने का झूठा दावा नहीं कर सकता।
  • ग्राहकों को सदैव नवीनतम एवं सही जानकारी प्राप्त होती है।
  • प्रत्यायन प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहती है।
  • प्रत्यायन चिन्ह (Accreditation Mark) का दुरुपयोग रोका जाता है।

यद्यपि परिवर्तन से पूर्व सूचना नहीं दी जाती, तथापि परिवर्तन लागू होने के तुरंत बाद संबंधित निरीक्षण निकाय को औपचारिक सूचना उपलब्ध करा दी जाती है।


7.3 सतत निगरानी (Ongoing Surveillance)

प्रत्यायन एक बार प्राप्त कर लेने के बाद स्थायी रूप से मान्य नहीं रहता।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि निरीक्षण निकाय लगातार ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं का पालन करता रहे, SDAB समय-समय पर निगरानी मूल्यांकन (Surveillance Assessments) आयोजित करता है।


सामान्य निगरानी कार्यक्रम

  • सामान्यतः प्रत्येक वर्ष निगरानी मूल्यांकन किया जाता है।
  • लगभग प्रत्येक चार वर्ष में पूर्ण पुनर्मूल्यांकन (Re-assessment) किया जाता है।

निरीक्षण निकाय की जिम्मेदारियाँ

प्रत्यायन अवधि के दौरान निरीक्षण निकाय को निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तनों की सूचना SDAB को देनी होगी—

  • प्रबंधन में परिवर्तन
  • स्वामित्व में परिवर्तन
  • संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन
  • कार्यालय अथवा निरीक्षण स्थल में परिवर्तन
  • प्रत्यायन कार्यक्षेत्र में परिवर्तन
  • प्रमुख तकनीकी कर्मचारियों में परिवर्तन

इसके अतिरिक्त निरीक्षण निकाय को आवश्यकतानुसार—

  • दक्षता परीक्षण (Proficiency Testing)
  • इंटर-लेबोरेटरी तुलना (Inter-Laboratory Comparison)
  • तकनीकी मूल्यांकन
  • विशेष निगरानी कार्यक्रम

में भी भाग लेना होगा।


सारांश

सुधारात्मक कार्यवाही, सार्वजनिक रजिस्टर तथा सतत निगरानी प्रत्यायन प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

इनके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्यायित निरीक्षण निकाय केवल प्रत्यायन प्राप्त करने तक ही सीमित न रहे, बल्कि निरंतर अपनी तकनीकी क्षमता, निष्पक्षता, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को बनाए रखे।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रत्यायन (Accreditation) की प्रक्रिया निरीक्षण निकाय (Inspection Body) तथा प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) के मध्य एक सुव्यवस्थित एवं उत्तरदायित्वपूर्ण साझेदारी है।

इस प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि निरीक्षण निकाय का शीर्ष प्रबंधन गुणवत्ता (Quality), तकनीकी दक्षता (Technical Competence), निष्पक्षता (Impartiality) तथा गोपनीयता (Confidentiality) के प्रति कितना समर्पित है।

यद्यपि प्रत्यायन प्राप्त करने की प्रक्रिया विस्तृत, कठोर एवं समय-साध्य होती है, किन्तु इसके परिणामस्वरूप संगठन को अनेक महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे—

  • बाजार में विश्वसनीयता (Market Credibility) में वृद्धि।
  • ग्राहकों एवं नियामक संस्थाओं का विश्वास प्राप्त होना।
  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करने की आधिकारिक मान्यता।
  • सरकारी एवं निजी परियोजनाओं में भागीदारी के अधिक अवसर।
  • गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में सतत सुधार (Continual Improvement)।
  • तकनीकी दक्षता का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रमाणन।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरीक्षण परिणामों की स्वीकार्यता (Global Acceptance of Inspection Results)।

प्रत्यायन केवल एक प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह गुणवत्ता, पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा उत्कृष्टता के प्रति संगठन की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

एक प्रभावी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली तथा नियमित निगरानी के माध्यम से निरीक्षण निकाय दीर्घकाल तक अपनी विश्वसनीयता बनाए रख सकता है और उद्योग, सरकार तथा समाज के लिए भरोसेमंद निरीक्षण सेवाएँ प्रदान कर सकता है।

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