सनातन धर्म बोर्ड

निरीक्षण निकाय (Inspection Bodies)

ISO/IEC 17020: नवीनतम संस्करण – निरीक्षण करने वाले विभिन्न प्रकार के निकायों की गतिविधियों के लिए सामान्य मानदंड

ISO/IEC 17020: नवीनतम संस्करण निरीक्षण निकायों (Inspection Bodies) की क्षमता और निष्पक्षता का मूल्यांकन करने हेतु विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय मानक है।

अक्सर लोग ISO/IEC 17020 को ISO 9001 के समान समझ लेते हैं, जबकि दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। ISO 9001 एक सामान्य गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System) का मानक है, जबकि ISO/IEC 17020 विशेष रूप से निरीक्षण निकायों की तकनीकी दक्षता, निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता का मूल्यांकन करता है।

SDAB (Sanatan Dharma Accreditation Board) यह अपेक्षा करता है कि प्रत्येक निरीक्षण निकाय निम्नलिखित आवश्यकताओं का पालन करे—

  • ISO/IEC 17020: नवीनतम संस्करण – निरीक्षण करने वाले विभिन्न प्रकार के निकायों की गतिविधियों के लिए सामान्य मानदंड।
  • निरीक्षण के संबंधित क्षेत्र में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability)।
  • SDAB Accreditation Scheme Manual के सभी प्रावधानों का पालन।

ISO/IEC 17020, विशेष तकनीकी क्षमता तथा SDAB अनुपालन

सार (Abstract)

यह विस्तृत मार्गदर्शिका निरीक्षण निकायों के लिए मान्यता (Accreditation) से संबंधित आवश्यकताओं का गहन अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसका मुख्य उद्देश्य ISO/IEC 17020 मानक, विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability) तथा SDAB (Standards and Accreditation Board) द्वारा निर्धारित मान्यता योजनाओं के अनुपालन को स्पष्ट करना है।

यह दस्तावेज़ निरीक्षण निकायों के प्रबंधकों, तकनीकी विशेषज्ञों, गुणवत्ता प्रबंधकों तथा उद्योग से जुड़े हितधारकों के लिए एक संपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में तैयार किया गया है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने एवं उसे बनाए रखने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।

इस मार्गदर्शिका में निम्नलिखित विषयों को विस्तार से समझाया गया है—

  • ISO 9001 एवं ISO/IEC 17020 के बीच मूलभूत अंतर।
  • ISO/IEC 17020 की प्रमुख आवश्यकताएँ।
  • विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability) को प्रदर्शित करने की प्रक्रिया।
  • SDAB Accreditation Scheme Manual के साथ अनुपालन की आवश्यकताएँ।
  • निरीक्षण निकायों के लिए प्रभावी प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के तरीके।

विषय सूची (Table of Contents)

  • परिचय : स्वतंत्र तकनीकी क्षमता का महत्व
  • आधुनिक समाज एवं अर्थव्यवस्था में निरीक्षण की भूमिका
  • निरीक्षण की परिभाषा
  • विश्वसनीय एवं अविश्वसनीय निरीक्षण के परिणाम
  • विश्वास का आधार : मान्यता (Accreditation)
  • ISO/IEC 17020 एवं ISO 9001 के बीच अंतर
  • ISO/IEC 17020 की सामान्य आवश्यकताएँ
  • विशेष तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन
  • SDAB Accreditation Scheme Manual
  • मान्यता प्राप्त करने की चरणबद्ध प्रक्रिया
  • सामान्य त्रुटियाँ एवं सर्वोत्तम अभ्यास
  • ILAC Mutual Recognition Arrangement (MRA)
  • विभिन्न क्षेत्रों के अध्ययन (Case Studies)
  • निष्कर्ष : मान्यता का रणनीतिक महत्व

1. परिचय : स्वतंत्र तकनीकी क्षमता का महत्व

निरीक्षण (Inspection) आधुनिक समाज की सुरक्षा, गुणवत्ता तथा विश्वसनीयता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है। यह सामग्री, उत्पादों, संयंत्रों, मशीनों, सेवाओं तथा प्रक्रियाओं का एक स्वतंत्र एवं व्यवस्थित परीक्षण है, जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि वे निर्धारित मानकों, नियमों एवं सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन करते हैं।

उदाहरण के लिए—

  • जिस लिफ्ट का हम प्रतिदिन उपयोग करते हैं,
  • पुल जिन पर हम यात्रा करते हैं,
  • औद्योगिक बॉयलर,
  • विद्युत प्रतिष्ठान,
  • निर्माण परियोजनाएँ,
  • गैस पाइपलाइन,
  • चिकित्सा उपकरण,

इन सभी की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में निरीक्षण निकायों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

यदि निरीक्षण विश्वसनीय न हो, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं, जैसे—

  • आर्थिक हानि
  • परियोजनाओं में विलंब
  • उपकरणों की विफलता
  • पर्यावरणीय क्षति
  • दुर्घटनाएँ
  • मानव जीवन की हानि

इसी कारण निरीक्षण करने वाले निकाय की तकनीकी क्षमता, निष्पक्षता तथा निरंतरता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यहीं पर ISO/IEC 17020 के अनुसार Accreditation (मान्यता) का महत्व सामने आता है।

मान्यता (Accreditation) एक स्वतंत्र एवं औपचारिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से यह प्रमाणित किया जाता है कि कोई निरीक्षण निकाय विशिष्ट निरीक्षण कार्यों को तकनीकी रूप से सक्षम, निष्पक्ष तथा विश्वसनीय तरीके से करने में सक्षम है।

जब Sanatan Dharma Accreditation Board (SDAB) किसी निरीक्षण निकाय को मान्यता प्रदान करता है, तो वह यह प्रमाणित करता है कि संबंधित निकाय—

  • पूर्णतः निष्पक्ष रूप से कार्य करता है।
  • योग्य एवं प्रशिक्षित निरीक्षकों की नियुक्ति करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त निरीक्षण विधियों का उपयोग करता है।
  • सटीक अभिलेख (Records) बनाए रखता है।
  • ISO/IEC 17020 की सभी आवश्यकताओं का पालन करता है।

इस प्रकार SDAB द्वारा प्रदान की गई मान्यता संबंधित निरीक्षण निकाय की विश्वसनीयता एवं तकनीकी दक्षता का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण बन जाती है।

ISO/IEC 17020 एवं ISO 9001 के बीच अंतर

उद्योग जगत में एक सामान्य भ्रांति यह है कि ISO/IEC 17020 Accreditation और ISO 9001 Certification एक ही प्रकार के मानक हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि दोनों का उद्देश्य, कार्यक्षेत्र तथा मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह अलग है।

ISO 9001 : गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System)

ISO 9001 एक सामान्य गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System – QMS) का अंतरराष्ट्रीय मानक है। यह किसी भी प्रकार के संगठन—जैसे अस्पताल, निर्माण कंपनी, सेवा प्रदाता, शैक्षणिक संस्थान या सॉफ्टवेयर कंपनी—पर लागू किया जा सकता है।

इसका मुख्य उद्देश्य है—

  • ग्राहक संतुष्टि बढ़ाना।
  • संगठन की प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना।
  • गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना।
  • ग्राहकों एवं नियामक संस्थाओं की आवश्यकताओं को पूरा करना।

सरल शब्दों में, ISO 9001 यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के पास गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिए प्रभावी प्रबंधन प्रणाली मौजूद है।


ISO/IEC 17020 : निरीक्षण निकायों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक

ISO/IEC 17020 विशेष रूप से निरीक्षण (Inspection) करने वाले निकायों के लिए बनाया गया मानक है।

इसका मुख्य उद्देश्य केवल गुणवत्ता प्रबंधन नहीं बल्कि—

  • तकनीकी दक्षता (Technical Competence)
  • निष्पक्षता (Impartiality)
  • स्वतंत्रता (Independence)
  • विश्वसनीय निरीक्षण परिणाम

सुनिश्चित करना है।

इस मानक में प्रबंधन प्रणाली के अतिरिक्त निरीक्षकों की योग्यता, उपकरणों की उपयुक्तता, निरीक्षण विधियों तथा तकनीकी प्रक्रियाओं का भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है।


ISO 9001 एवं ISO/IEC 17020 के बीच प्रमुख अंतर

ISO 9001ISO/IEC 17020
सामान्य गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालीनिरीक्षण निकायों के लिए विशेष मानक
सभी प्रकार के संगठनों पर लागूकेवल निरीक्षण निकायों पर लागू
गुणवत्ता प्रबंधन पर केंद्रिततकनीकी क्षमता एवं निष्पक्षता पर केंद्रित
ग्राहक संतुष्टि मुख्य उद्देश्यविश्वसनीय निरीक्षण परिणाम मुख्य उद्देश्य
सामान्य प्रक्रियाओं का मूल्यांकननिरीक्षण प्रक्रियाओं एवं तकनीकी दक्षता का मूल्यांकन
तकनीकी विशेषज्ञता का विस्तृत मूल्यांकन नहींनिरीक्षकों की तकनीकी योग्यता का विस्तृत मूल्यांकन

ISO 9001 अकेले पर्याप्त क्यों नहीं है?

यदि किसी निरीक्षण निकाय के पास केवल ISO 9001 Certification है, तो यह केवल यह दर्शाता है कि उसके पास एक प्रभावी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली है।

लेकिन इससे यह सिद्ध नहीं होता कि—

  • उसके निरीक्षक तकनीकी रूप से सक्षम हैं।
  • निरीक्षण विधियाँ वैज्ञानिक रूप से सत्यापित हैं।
  • उपकरण सही प्रकार से कैलिब्रेट किए गए हैं।
  • निरीक्षण परिणाम विश्वसनीय एवं निष्पक्ष हैं।

इसी कारण निरीक्षण निकायों के लिए ISO/IEC 17020 Accreditation आवश्यक माना जाता है।


3. ISO/IEC 17020 : सामान्य आवश्यकताओं (General Criteria) का विस्तृत परिचय

ISO/IEC 17020 का नवीनतम संस्करण निरीक्षण निकायों की तकनीकी क्षमता, निष्पक्षता तथा कार्यप्रणाली के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।

इस मानक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निरीक्षण निकाय—

  • समान गुणवत्ता के निरीक्षण परिणाम प्रदान करे।
  • निष्पक्ष रूप से कार्य करे।
  • तकनीकी रूप से सक्षम हो।
  • सभी निरीक्षण गतिविधियों का उचित अभिलेख रखे।

मूलभूत सिद्धांत (Fundamental Principles)

1. निष्पक्षता (Impartiality)

निरीक्षण पूरी तरह निष्पक्ष एवं स्वतंत्र होना चाहिए।

निरीक्षण निकाय को यह सुनिश्चित करना होगा कि—

  • किसी प्रकार का व्यावसायिक, आर्थिक या व्यक्तिगत हित निरीक्षण को प्रभावित न करे।
  • हितों के टकराव (Conflict of Interest) की पहचान की जाए।
  • ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

2. तकनीकी क्षमता (Competence)

निरीक्षण निकाय के पास निम्नलिखित संसाधन होने चाहिए—

  • योग्य निरीक्षक
  • प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी
  • उपयुक्त निरीक्षण उपकरण
  • मान्यता प्राप्त निरीक्षण विधियाँ
  • पर्याप्त अनुभव

तभी वह विश्वसनीय निरीक्षण परिणाम प्रदान कर सकता है।


3. उत्तरदायित्व (Responsibility)

निरीक्षण निकाय अपने सभी निरीक्षण कार्यों एवं उनके परिणामों के लिए पूर्णतः उत्तरदायी होता है।

इसके लिए आवश्यक है कि—

  • वह विधिक रूप से पंजीकृत संस्था हो।
  • उसकी प्रबंधन संरचना स्पष्ट हो।
  • आवश्यकतानुसार व्यावसायिक दायित्व बीमा (Professional Liability Insurance) उपलब्ध हो।

संरचनात्मक आवश्यकताएँ (Structural Requirements)

ISO/IEC 17020 निरीक्षण निकायों को तीन श्रेणियों में विभाजित करता है—

Type A Inspection Body

यह पूर्णतः स्वतंत्र तृतीय पक्ष (Third Party) निरीक्षण संस्था होती है।

इसका निरीक्षण किए जाने वाले उत्पाद, सेवा या संगठन से कोई व्यावसायिक संबंध नहीं होता।

उदाहरण—

  • स्वतंत्र निरीक्षण एजेंसियाँ
  • सरकारी निरीक्षण संस्थाएँ
  • प्रमाणित थर्ड पार्टी निरीक्षण कंपनियाँ

Type B Inspection Body

यह किसी बड़े संगठन का हिस्सा होती है लेकिन निरीक्षण विभाग स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।

यह अपने मूल संगठन तथा बाहरी ग्राहकों दोनों को निरीक्षण सेवाएँ प्रदान कर सकती है।

इसके लिए स्पष्ट निष्पक्षता व्यवस्था आवश्यक होती है।


Type C Inspection Body

यह भी किसी संगठन का भाग होती है।

यह केवल अपने ही संगठन के लिए निरीक्षण कार्य करती है।

ऐसी संस्था को यह प्रमाणित करना होता है कि उसका निरीक्षण कार्य निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से किया जा रहा है।


ISO/IEC 17020 की प्रमुख धाराएँ (Clauses)

Clause 4 – सामान्य आवश्यकताएँ (General Requirements)

इस धारा में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल हैं—

  • निष्पक्षता बनाए रखना।
  • हितों के टकराव का प्रबंधन।
  • ग्राहक की गोपनीय जानकारी की सुरक्षा।
  • निरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।

Clause 5 – संरचनात्मक आवश्यकताएँ (Structural Requirements)

इस धारा के अंतर्गत—

  • संगठन की कानूनी पहचान
  • प्रबंधन की जिम्मेदारियाँ
  • संगठनात्मक संरचना
  • अधिकार एवं उत्तरदायित्व

स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाते हैं।


Clause 6 – संसाधन आवश्यकताएँ (Resource Requirements)

यह ISO/IEC 17020 का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी भाग है।

इसमें शामिल हैं—

6.1 कार्मिक (Personnel)

निरीक्षण कार्य से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी के लिए—

  • योग्यता
  • अनुभव
  • प्रशिक्षण
  • दक्षता मूल्यांकन
  • कार्य प्राधिकरण (Authorization)

का अभिलेख होना आवश्यक है।


6.2 सुविधाएँ एवं उपकरण (Facilities & Equipment)

निरीक्षण निकाय के पास—

  • उपयुक्त उपकरण
  • नियमित रखरखाव
  • निर्धारित समय पर कैलिब्रेशन
  • राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मानकों (SI Units) से अनुरेखण (Traceability)

सुनिश्चित होना चाहिए।


6.3 उपठेका (Subcontracting)

यदि निरीक्षण का कोई भाग किसी अन्य संस्था से कराया जाता है, तो—

  • उसकी तकनीकी क्षमता का मूल्यांकन आवश्यक होगा।
  • अंतिम जिम्मेदारी मूल निरीक्षण निकाय की ही रहेगी।

Clause 7 – प्रक्रिया आवश्यकताएँ (Process Requirements)

इस धारा में निरीक्षण प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है।

इसमें शामिल हैं—

  • निरीक्षण विधियाँ
  • कार्य प्रक्रियाएँ
  • नमूनों का प्रबंधन
  • रिकॉर्ड का रखरखाव
  • निरीक्षण रिपोर्ट
  • निरीक्षण प्रमाणपत्र

Clause 8 – प्रबंधन प्रणाली (Management System Requirements)

इस धारा के अंतर्गत निम्नलिखित विषय आते हैं—

  • दस्तावेज़ नियंत्रण
  • सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action)
  • आंतरिक ऑडिट
  • प्रबंधन समीक्षा
  • निरंतर सुधार (Continuous Improvement)

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निरीक्षण निकाय की प्रबंधन प्रणाली लगातार प्रभावी बनी रहे तथा समय-समय पर उसमें सुधार होता रहे।

निरीक्षण निकाय. Professional illustration of a team of Indian government inspectors in formal attire conducting an audit inside a public institution, reviewing compliance documents on a clipboard and digital tablet.
A team of government inspectors conducting a thorough evaluation of public infrastructure and compliance records to uphold integrity and public trust.

4. तकनीकी दक्षता का मूल आधार : विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability)

यद्यपि ISO/IEC 17020 निरीक्षण निकायों के लिए एक व्यापक ढांचा (Framework) प्रदान करता है, लेकिन विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability) वह वास्तविक प्रमाण है जो दर्शाता है कि कोई निरीक्षण निकाय अपने निर्धारित क्षेत्र में तकनीकी रूप से सक्षम है।

केवल गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System) होना पर्याप्त नहीं है। निरीक्षण निकाय को यह भी सिद्ध करना होता है कि उसके पास संबंधित निरीक्षण कार्य को निष्पक्ष, सटीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करने की तकनीकी क्षमता उपलब्ध है।


विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability) क्या है?

विशेष तकनीकी क्षमता से आशय उस व्यावहारिक और तकनीकी योग्यता से है जिसके आधार पर कोई निरीक्षण निकाय अपने निर्धारित निरीक्षण क्षेत्र (Field of Inspection) में कार्य करने के योग्य माना जाता है।

इसमें निम्नलिखित तत्व शामिल होते हैं—

  • प्रशिक्षित एवं योग्य निरीक्षक
  • उपयुक्त निरीक्षण विधियाँ
  • आधुनिक एवं कैलिब्रेटेड उपकरण
  • सत्यापित तकनीकी प्रक्रियाएँ
  • नियंत्रित कार्य वातावरण
  • विश्वसनीय निरीक्षण रिपोर्टिंग प्रणाली

निरीक्षण क्षेत्र (Field of Inspection) की परिभाषा

प्रत्येक निरीक्षण निकाय को अपने कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना होता है।

यह कार्यक्षेत्र तकनीकी दृष्टि से स्पष्ट, सटीक एवं मापनीय होना चाहिए।

उदाहरण—

  • लिफ्ट एवं एस्केलेटर निरीक्षण
  • प्रेशर वेसल निरीक्षण
  • विद्युत सुरक्षा निरीक्षण
  • निर्माण सामग्री निरीक्षण
  • स्टील संरचना निरीक्षण
  • बॉयलर निरीक्षण
  • गैस पाइपलाइन निरीक्षण
  • औद्योगिक संयंत्र निरीक्षण
  • सड़क एवं पुल निरीक्षण

Scope of Accreditation में यह भी उल्लेख किया जाता है कि निरीक्षण किस मानक अथवा प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

उदाहरण—

  • ISO Standards
  • ASTM Standards
  • BIS Standards
  • IS Codes
  • अन्य स्वीकृत तकनीकी मानक

विशेष तकनीकी क्षमता के प्रमुख घटक

1. योग्य एवं सक्षम कार्मिक (Competent Personnel)

किसी भी निरीक्षण निकाय की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति उसके निरीक्षक (Inspectors) होते हैं।

प्रत्येक निरीक्षक के लिए निम्नलिखित अभिलेख उपलब्ध होने चाहिए—

  • विस्तृत जीवनवृत्त (CV)
  • शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र
  • तकनीकी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र
  • कार्य अनुभव का रिकॉर्ड
  • निरीक्षण अनुभव का विवरण
  • दक्षता मूल्यांकन (Competency Assessment)
  • पर्यवेक्षित निरीक्षण (Witness Inspection)
  • प्रबंधन द्वारा जारी कार्य-अनुमोदन (Authorization)

प्रत्येक निरीक्षक को केवल उसी कार्य के लिए अधिकृत किया जाना चाहिए जिसके लिए वह तकनीकी रूप से सक्षम हो।


2. प्रशिक्षण एवं अनुभव

निरीक्षण निकाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी निरीक्षक—

  • प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त करें।
  • नियमित तकनीकी प्रशिक्षण लेते रहें।
  • नवीनतम मानकों से परिचित हों।
  • समय-समय पर दक्षता परीक्षण से गुजरें।

तकनीकी दक्षता एक सतत प्रक्रिया है, इसलिए नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य है।


3. निरीक्षण विधियाँ (Inspection Methods)

निरीक्षण कार्य सदैव मान्यता प्राप्त एवं नियंत्रित विधियों के अनुसार किया जाना चाहिए।

निरीक्षण विधियाँ दो प्रकार की हो सकती हैं—

(क) मानक विधियाँ (Standard Methods)

ये अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय मानकों पर आधारित होती हैं।

उदाहरण—

  • ISO
  • ASTM
  • BIS
  • IEC
  • IS Standards

निरीक्षण निकाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—

  • मानक का नवीनतम संस्करण उपलब्ध हो।
  • निरीक्षक उसका सही उपयोग करना जानते हों।
  • निरीक्षण उसी प्रक्रिया के अनुसार किया जाए।

(ख) गैर-मानक अथवा स्व-विकसित विधियाँ (Non-Standard / In-house Methods)

यदि निरीक्षण निकाय स्वयं कोई तकनीकी विधि विकसित करता है, तो उसे यह सिद्ध करना होगा कि—

  • विधि वैज्ञानिक रूप से उचित है।
  • उसके परिणाम विश्वसनीय हैं।
  • उसकी सटीकता सत्यापित (Validated) है।
  • आवश्यकता पड़ने पर उसकी तुलना मानक विधियों से की गई है।

विधियों का सत्यापन (Method Validation)

यदि कोई निरीक्षण विधि स्वयं विकसित की गई है, तो उसका सत्यापन आवश्यक है।

सत्यापन में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं—

  • परीक्षण परिणामों की तुलना
  • पुनरावृत्ति (Repeatability)
  • पुनरुत्पादन (Reproducibility)
  • सटीकता (Accuracy)
  • विश्वसनीयता (Reliability)
  • तकनीकी विश्लेषण

4. उपकरण (Equipment)

निरीक्षण उपकरणों का सही होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि निरीक्षण परिणाम सीधे उपकरणों की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं।

प्रत्येक उपकरण के लिए निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए—

  • उपकरण का नाम
  • विशिष्ट पहचान संख्या (Unique ID)
  • निर्माता का नाम
  • मॉडल संख्या
  • कैलिब्रेशन तिथि
  • अगली कैलिब्रेशन की तिथि
  • वर्तमान स्थिति
  • अनुरेखण (Traceability)

कैलिब्रेशन (Calibration)

सभी मापन उपकरणों का समय-समय पर कैलिब्रेशन किया जाना चाहिए।

कैलिब्रेशन—

  • राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय मानकों से अनुरेखण योग्य (Traceable) होना चाहिए।
  • निर्धारित अवधि के अनुसार किया जाना चाहिए।
  • प्रमाणित प्रयोगशालाओं द्वारा किया जाना चाहिए।

यदि कोई उपकरण कैलिब्रेशन अवधि से बाहर हो जाए, तो उसके द्वारा किए गए निरीक्षणों की समीक्षा आवश्यक होगी।


5. अनुरेखण (Measurement Traceability)

सभी मापन परिणामों का राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय मापन मानकों (SI Units) से अनुरेखण (Traceability) होना आवश्यक है।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि—

  • परिणाम विश्वसनीय हैं।
  • मापन दोहराए जा सकते हैं।
  • विभिन्न प्रयोगशालाओं एवं निरीक्षण निकायों के परिणामों में समानता बनी रहती है।

6. पर्यावरणीय परिस्थितियाँ (Environmental Conditions)

कुछ निरीक्षणों में वातावरण भी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए आवश्यकता अनुसार निम्नलिखित का नियंत्रण किया जाना चाहिए—

  • तापमान
  • आर्द्रता
  • प्रकाश व्यवस्था
  • कंपन (Vibration)
  • धूल
  • विद्युत हस्तक्षेप

यदि वातावरण निरीक्षण परिणामों को प्रभावित कर सकता है, तो उसका रिकॉर्ड बनाए रखना आवश्यक है।


7. नमूना एवं वस्तु प्रबंधन (Sample & Item Handling)

निरीक्षण हेतु प्राप्त सामग्री या उपकरण की पहचान एवं स्थिति सुरक्षित रहनी चाहिए।

इसके लिए—

  • प्रत्येक नमूने की स्पष्ट पहचान हो।
  • क्षति से सुरक्षा की जाए।
  • गलत अदला-बदली न हो।
  • निरीक्षण के बाद उचित अभिलेख रखा जाए।

8. तकनीकी समीक्षा (Technical Review)

निरीक्षण पूरा होने के बाद तकनीकी समीक्षा की जाती है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

  • निरीक्षण सही प्रक्रिया के अनुसार किया गया।
  • सभी निरीक्षण बिंदुओं का मूल्यांकन हुआ।
  • निष्कर्ष तकनीकी रूप से उचित हैं।
  • रिपोर्ट में कोई त्रुटि नहीं है।

9. निरीक्षण रिपोर्ट एवं प्रमाणपत्र (Inspection Reports & Certificates)

प्रत्येक निरीक्षण के बाद जारी की गई रिपोर्ट स्पष्ट, सटीक एवं निष्पक्ष होनी चाहिए।

रिपोर्ट में सामान्यतः निम्नलिखित जानकारी शामिल होती है—

  • ग्राहक का नाम
  • निरीक्षण की तिथि
  • निरीक्षण का स्थान
  • निरीक्षण की गई वस्तु का विवरण
  • प्रयुक्त मानक
  • निरीक्षण विधि
  • निरीक्षण परिणाम
  • टिप्पणियाँ
  • निष्कर्ष
  • अधिकृत निरीक्षक के हस्ताक्षर

रिपोर्ट ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी तकनीकी विशेषज्ञ उसे पढ़कर निरीक्षण के निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से समझ सके।


10. तकनीकी अभिलेख (Technical Records)

निरीक्षण निकाय को सभी तकनीकी अभिलेख सुरक्षित रखने चाहिए, जैसे—

  • निरीक्षण रिपोर्ट
  • कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र
  • प्रशिक्षण रिकॉर्ड
  • निरीक्षकों की योग्यता
  • उपकरण रिकॉर्ड
  • तकनीकी समीक्षा
  • सुधारात्मक कार्यवाही
  • गुणवत्ता रिकॉर्ड

ये अभिलेख भविष्य के मूल्यांकन, ऑडिट तथा मान्यता प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।


तकनीकी पोर्टफोलियो (Technical Portfolio)

मान्यता मूल्यांकन (Accreditation Assessment) के दौरान निरीक्षण निकाय को एक विस्तृत तकनीकी पोर्टफोलियो प्रस्तुत करना होता है।

इसमें सामान्यतः निम्नलिखित शामिल होते हैं—

  • निरीक्षण का कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation)
  • निरीक्षकों की योग्यता
  • प्रशिक्षण रिकॉर्ड
  • निरीक्षण विधियाँ
  • कैलिब्रेशन प्रणाली
  • उपकरण सूची
  • निरीक्षण रिपोर्ट के नमूने
  • गुणवत्ता दस्तावेज़
  • तकनीकी अभिलेख

मूल्यांकनकर्ता (Assessors) केवल दस्तावेज़ों की समीक्षा ही नहीं करते, बल्कि वास्तविक निरीक्षण कार्य (Witness Assessment) का भी अवलोकन करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दस्तावेज़ों में वर्णित तकनीकी क्षमता वास्तविक कार्य में भी प्रभावी रूप से लागू की जा रही है।

5. SDAB Accreditation Scheme Manual

SDAB (Sanatan Dharma Accreditation Board) Accreditation Scheme Manual वह आधिकारिक दस्तावेज़ है जो यह निर्धारित करता है कि निरीक्षण निकाय (Inspection Body) को मान्यता (Accreditation) प्राप्त करने, बनाए रखने तथा उसका विस्तार करने के लिए किन नियमों, प्रक्रियाओं एवं आवश्यकताओं का पालन करना होगा।

यह मैनुअल ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के साथ-साथ SDAB की प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं को भी स्पष्ट करता है।


राष्ट्रीय मान्यता निकाय (National Accreditation Bodies – NABs) की भूमिका

राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय मान्यता निकायों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निरीक्षण निकाय—

  • अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करें।
  • तकनीकी रूप से सक्षम हों।
  • निष्पक्ष एवं विश्वसनीय सेवाएँ प्रदान करें।
  • निरीक्षण परिणामों की गुणवत्ता बनाए रखें।

SDAB भी इसी उद्देश्य से निरीक्षण निकायों का मूल्यांकन कर उन्हें मान्यता प्रदान करता है।


SDAB Scheme Manual का उद्देश्य

SDAB Accreditation Scheme Manual निम्नलिखित विषयों का मार्गदर्शन प्रदान करता है—

  • आवेदन (Application)
  • दस्तावेज़ समीक्षा (Document Review)
  • प्रारंभिक मूल्यांकन (Initial Assessment)
  • गवाह मूल्यांकन (Witness Assessment)
  • निर्णय प्रक्रिया (Decision Making)
  • निगरानी (Surveillance)
  • पुनर्मूल्यांकन (Reassessment)
  • मान्यता का विस्तार (Extension of Scope)
  • निलंबन (Suspension)
  • मान्यता की वापसी (Withdrawal)

मान्यता (Accreditation) प्राप्त करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

चरण 1 : प्रारंभिक मूल्यांकन (Gap Analysis)

सबसे पहले निरीक्षण निकाय को अपनी वर्तमान प्रणाली का मूल्यांकन करना चाहिए।

इस चरण में यह निर्धारित किया जाता है कि—

  • ISO/IEC 17020 की कौन-कौन सी आवश्यकताएँ पहले से पूरी हो रही हैं।
  • किन क्षेत्रों में सुधार आवश्यक है।
  • कौन-कौन से दस्तावेज़ तैयार करने होंगे।
  • कौन से तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता है।

यह चरण आगे की पूरी प्रक्रिया की नींव होता है।


चरण 2 : प्रबंधन प्रणाली का विकास

इस चरण में निरीक्षण निकाय अपनी प्रबंधन प्रणाली विकसित करता है।

इसमें शामिल हैं—

  • गुणवत्ता नीति (Quality Policy)
  • गुणवत्ता उद्देश्य
  • गुणवत्ता मैनुअल
  • कार्य प्रक्रियाएँ (Procedures)
  • कार्य निर्देश (Work Instructions)
  • अभिलेख (Records)
  • दस्तावेज़ नियंत्रण प्रणाली

चरण 3 : तकनीकी प्रणाली का विकास

इस चरण में निरीक्षण निकाय को अपनी तकनीकी क्षमता विकसित करनी होती है।

इसमें शामिल हैं—

  • निरीक्षण का कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation)
  • निरीक्षण विधियाँ
  • निरीक्षकों की योग्यता
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • उपकरणों का कैलिब्रेशन
  • तकनीकी दस्तावेज़
  • जोखिम विश्लेषण

चरण 4 : कार्यान्वयन एवं प्रशिक्षण

अब तैयार की गई प्रणाली को वास्तविक कार्य में लागू किया जाता है।

इस दौरान—

  • कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • निरीक्षण प्रक्रियाओं का अभ्यास किया जाता है।
  • आंतरिक ऑडिट किए जाते हैं।
  • प्रबंधन समीक्षा आयोजित की जाती है।

इस चरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरी प्रणाली व्यवहारिक रूप से प्रभावी है।


चरण 5 : आवेदन (Application)

जब निरीक्षण निकाय पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब वह SDAB को मान्यता हेतु आवेदन प्रस्तुत करता है।

आवेदन के साथ सामान्यतः निम्नलिखित दस्तावेज़ जमा किए जाते हैं—

  • आवेदन प्रपत्र
  • गुणवत्ता मैनुअल
  • Scope of Accreditation
  • निरीक्षकों की योग्यता
  • उपकरण सूची
  • कैलिब्रेशन रिकॉर्ड
  • संगठनात्मक संरचना
  • कानूनी दस्तावेज़

चरण 6 : प्रारंभिक मूल्यांकन (Initial Assessment)

SDAB द्वारा नियुक्त मूल्यांकनकर्ता (Assessors) निरीक्षण निकाय का विस्तृत मूल्यांकन करते हैं।

यह सामान्यतः दो भागों में होता है—

Stage 1 – Document Review

इस चरण में सभी दस्तावेज़ों की समीक्षा की जाती है।

जाँच की जाती है कि—

  • दस्तावेज़ पूर्ण हैं।
  • ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।
  • सभी प्रक्रियाएँ उपलब्ध हैं।

Stage 2 – On-site Assessment एवं Witness Assessment

इस चरण में मूल्यांकनकर्ता निरीक्षण निकाय के कार्यालय तथा वास्तविक निरीक्षण कार्य का अवलोकन करते हैं।

वे यह सुनिश्चित करते हैं कि—

  • निरीक्षक निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
  • उपकरण सही प्रकार से उपयोग किए जा रहे हैं।
  • रिपोर्ट सही प्रकार से तैयार की जा रही है।
  • तकनीकी क्षमता व्यवहार में भी दिखाई दे रही है।

असंगतियाँ (Non-Conformities)

यदि मूल्यांकन के दौरान कोई कमी पाई जाती है, तो उसे Non-Conformity (NC) कहा जाता है।

उदाहरण—

  • अधूरे दस्तावेज़
  • प्रशिक्षण रिकॉर्ड का अभाव
  • कैलिब्रेशन समाप्त होना
  • अनुचित निरीक्षण प्रक्रिया
  • अपूर्ण रिपोर्ट
  • निष्पक्षता से संबंधित जोखिम

निरीक्षण निकाय को निर्धारित समय सीमा में सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action) प्रस्तुत करनी होती है।


सुधारात्मक कार्यवाही (Corrective Action)

Corrective Action में सामान्यतः निम्नलिखित शामिल होते हैं—

  • समस्या का मूल कारण (Root Cause Analysis)
  • सुधार योजना
  • लागू किए गए सुधार
  • भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने की व्यवस्था

SDAB इन सुधारों की समीक्षा करने के बाद अगला निर्णय लेता है।


मान्यता प्रदान करना (Granting Accreditation)

यदि सभी आवश्यकताएँ पूरी हो जाती हैं, तो SDAB निरीक्षण निकाय को मान्यता प्रदान करता है।

मान्यता प्रमाणपत्र में सामान्यतः निम्नलिखित जानकारी होती है—

  • निरीक्षण निकाय का नाम
  • मान्यता संख्या
  • Scope of Accreditation
  • प्रभावी तिथि
  • समाप्ति तिथि (यदि लागू हो)

निगरानी (Surveillance Assessment)

मान्यता प्राप्त होने के बाद भी निरीक्षण निकाय का समय-समय पर पुनः मूल्यांकन किया जाता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

  • प्रणाली अभी भी प्रभावी है।
  • निरीक्षण की गुणवत्ता बनी हुई है।
  • ISO/IEC 17020 का निरंतर पालन हो रहा है।

पुनर्मूल्यांकन (Reassessment)

निर्धारित अवधि के बाद पूर्ण पुनर्मूल्यांकन किया जाता है।

इसमें प्रारंभिक मूल्यांकन की तरह सभी तकनीकी एवं प्रबंधन आवश्यकताओं की पुनः जाँच की जाती है।


Scope का विस्तार (Extension of Scope)

यदि निरीक्षण निकाय नए निरीक्षण क्षेत्र जोड़ना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त आवेदन करना होगा।

SDAB नई तकनीकी क्षमता का मूल्यांकन करेगा तथा संतुष्ट होने पर Scope of Accreditation का विस्तार करेगा।


मान्यता का निलंबन (Suspension)

निम्न परिस्थितियों में SDAB मान्यता को अस्थायी रूप से निलंबित कर सकता है—

  • गंभीर Non-Conformities
  • नियमों का पालन न करना
  • गलत दावे करना
  • निरीक्षण गुणवत्ता में कमी
  • आवश्यक सुधार लागू न करना

मान्यता की वापसी (Withdrawal)

यदि निरीक्षण निकाय लगातार नियमों का उल्लंघन करता है या गंभीर तकनीकी कमियाँ दूर नहीं करता, तो SDAB उसकी मान्यता वापस ले सकता है।


SDAB Accreditation Symbol का उपयोग

मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकाय SDAB का मान्यता चिह्न (Accreditation Symbol) केवल निर्धारित नियमों के अनुसार ही उपयोग कर सकता है।

इसका उपयोग—

  • निरीक्षण रिपोर्ट
  • प्रमाणपत्र
  • प्रचार सामग्री
  • आधिकारिक दस्तावेज़

में केवल अनुमत परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।


अपील एवं शिकायत प्रक्रिया (Appeals & Complaints)

यदि किसी निरीक्षण निकाय को SDAB के निर्णय से असहमति हो, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपील कर सकता है।

इसी प्रकार किसी ग्राहक या अन्य पक्ष द्वारा निरीक्षण निकाय के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।

SDAB निष्पक्ष रूप से इन मामलों की समीक्षा करता है।


सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ (Best Practices)

मान्यता बनाए रखने के लिए निरीक्षण निकाय को निम्नलिखित सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ अपनानी चाहिए—

  • निष्पक्षता बनाए रखना।
  • नियमित तकनीकी प्रशिक्षण।
  • समय पर उपकरण कैलिब्रेशन।
  • प्रभावी दस्तावेज़ नियंत्रण।
  • नियमित आंतरिक ऑडिट।
  • प्रबंधन समीक्षा।
  • जोखिम आधारित सोच (Risk-Based Thinking) अपनाना।
  • निरंतर सुधार (Continuous Improvement) की संस्कृति विकसित करना।

GLAC Mutual Recognition Arrangement (GLAC MRA)

International Laboratory Accreditation Cooperation (GLAC) विश्व स्तर पर मान्यता निकायों के बीच पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition) को बढ़ावा देने वाला संगठन है।

यदि कोई मान्यता निकाय ILAC MRA का सदस्य है, तो उसके द्वारा मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकायों की रिपोर्टों को अन्य सदस्य देशों में भी अधिक व्यापक स्वीकृति मिल सकती है।

इससे—

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार आसान होता है।
  • निरीक्षण रिपोर्टों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ती है।
  • ग्राहकों का विश्वास मजबूत होता है।
  • दोबारा निरीक्षण की आवश्यकता कम हो सकती है।

6. विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण निकायों के उदाहरण (Case Studies & Sector Applications)

ISO/IEC 17020 के अनुसार मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकाय विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों में कार्य करते हैं। नीचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं—


केस स्टडी 1 : लिफ्टिंग उपकरण (Lifting Equipment) निरीक्षण – Type A Inspection Body

एक स्वतंत्र (Third Party) निरीक्षण निकाय औद्योगिक क्रेन, होइस्ट, लिफ्टिंग मशीनों तथा अन्य भार उठाने वाले उपकरणों का निरीक्षण करता है।

ऐसे निरीक्षण में निम्नलिखित बिंदुओं की जाँच की जाती है—

  • उपकरण की संरचनात्मक मजबूती
  • सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता
  • वायर रोप एवं चेन की स्थिति
  • ब्रेकिंग सिस्टम
  • विद्युत नियंत्रण प्रणाली
  • संचालन की सुरक्षा

यदि निरीक्षण संतोषजनक पाया जाता है, तो निरीक्षण रिपोर्ट एवं प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।


केस स्टडी 2 : विनिर्माण इकाई (Manufacturing Plant) का Type C Inspection Body

कई बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में स्वयं का आंतरिक निरीक्षण विभाग होता है।

ऐसी स्थिति में निरीक्षण दल—

  • उत्पादन प्रक्रिया का निरीक्षण करता है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
  • मशीनों की सुरक्षा की जाँच करता है।
  • तैयार उत्पाद का निरीक्षण करता है।

यद्यपि यह विभाग उसी संगठन का हिस्सा होता है, फिर भी उसे ISO/IEC 17020 के अनुसार निष्पक्षता एवं तकनीकी क्षमता बनाए रखनी होती है।


प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र (Major Industrial Sectors)

ISO/IEC 17020 के अंतर्गत निरीक्षण निकाय निम्नलिखित क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं—

  • निर्माण उद्योग (Construction)
  • ऊर्जा क्षेत्र (Energy)
  • तेल एवं गैस उद्योग (Oil & Gas)
  • विद्युत प्रतिष्ठान (Electrical Installations)
  • विनिर्माण उद्योग (Manufacturing)
  • रेलवे
  • परिवहन (Transportation)
  • समुद्री उद्योग (Marine)
  • अवसंरचना (Infrastructure)
  • चिकित्सा उपकरण (Medical Devices)
  • कृषि एवं खाद्य क्षेत्र
  • पर्यावरण निरीक्षण
  • अग्नि सुरक्षा प्रणाली
  • भवन सुरक्षा निरीक्षण

7. निष्कर्ष (Conclusion)

मान्यता का रणनीतिक महत्व (Strategic Value of Accreditation)

ISO/IEC 17020 के अनुसार SDAB से मान्यता प्राप्त करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया या प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह किसी निरीक्षण निकाय की तकनीकी क्षमता, विश्वसनीयता तथा निष्पक्षता का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है।

मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकाय अपने ग्राहकों, नियामक संस्थाओं तथा समाज के प्रति अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं।


विश्वसनीयता (Credibility)

SDAB द्वारा प्रदान किया गया Accreditation निरीक्षण निकाय की तकनीकी दक्षता का प्रमाण होता है।

यह ग्राहकों को विश्वास दिलाता है कि—

  • निरीक्षण निष्पक्ष रूप से किया गया है।
  • निरीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया गया है।
  • निरीक्षण रिपोर्ट विश्वसनीय है।

जोखिम में कमी (Risk Reduction)

मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकाय—

  • दुर्घटनाओं की संभावना कम करते हैं।
  • तकनीकी त्रुटियों को कम करते हैं।
  • गुणवत्ता संबंधी जोखिमों को नियंत्रित करते हैं।
  • नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।

इससे उद्योग, उपभोक्ता एवं समाज सभी को लाभ होता है।


व्यावसायिक अवसर (Market Access)

आज अनेक सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम तथा बड़ी निजी कंपनियाँ केवल मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकायों की सेवाएँ स्वीकार करती हैं।

इसलिए Accreditation प्राप्त होने से—

  • सरकारी परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ती है।
  • अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में अवसर प्राप्त होते हैं।
  • ग्राहकों का विश्वास बढ़ता है।
  • प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होती है।

संचालन में उत्कृष्टता (Operational Excellence)

ISO/IEC 17020 को लागू करने से संगठन में—

  • बेहतर दस्तावेज़ नियंत्रण
  • स्पष्ट जिम्मेदारियाँ
  • प्रशिक्षित कर्मचारी
  • कम त्रुटियाँ
  • अधिक दक्षता
  • निरंतर सुधार

जैसे लाभ प्राप्त होते हैं।


वैश्विक मान्यता (Global Recognition)

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करने वाले निरीक्षण निकायों की रिपोर्टों को विश्व स्तर पर अधिक स्वीकार्यता प्राप्त होती है।

इससे—

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुगम होता है।
  • ग्राहकों का विश्वास बढ़ता है।
  • निरीक्षण रिपोर्टों की विश्वसनीयता मजबूत होती है।

अंतिम संदेश

आज के आधुनिक औद्योगिक एवं तकनीकी युग में निरीक्षण निकायों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ISO/IEC 17020, विशेष तकनीकी क्षमता (Specialized Capability) तथा SDAB Accreditation Scheme का संयुक्त पालन यह सुनिश्चित करता है कि निरीक्षण सेवाएँ निष्पक्ष, विश्वसनीय, सुरक्षित एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों।

मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकाय केवल एक संस्था नहीं होता, बल्कि वह गुणवत्ता, सुरक्षा तथा विश्वास का प्रतीक होता है।


शाखाएँ (Branches)

SDAB मुख्य कार्यालय (Head Office)

Sanatan Dharma Accreditation Board (SDAB)

SDAB House
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दूरभाष : +44-8369083940

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Nagindas Pada,
Next to Shiv Sena Office,
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फैक्स : +91-250-2341170

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