ISO/IEC 17020 निरीक्षण निकायों (Inspection Bodies) के प्रमाणपत्रों की शब्दावली (Wording of Certificates)
प्रस्तुति (Presentation)
घोषणाओं (Declarations) एवं प्रमाणपत्रों के निर्गमन में उचितता (Propriety) तथा सही पंजीकरण (Enrollment) सुनिश्चित करने के लिए प्रमाणपत्रों पर निम्नलिखित मानक शब्दावली का उपयोग किया जाना चाहिए। सामान्यतः इसे संदर्भ (Reference Statement) के रूप में अंकित किया जाता है।
“यह एक मान्यता प्राप्त (Accredited) प्रमाणपत्र है, जिसे [XXXX] द्वारा जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है। इस निरीक्षण निकाय का मूल्यांकन (Assessment) ‘Authorization Administration for Conforming Bodies LLC’ द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार तथा ISO/IEC 17020:2012 ‘Conformity Assessment — Requirements for the Operation of Various Types of Bodies Performing Inspection’ के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।”
टिप्पणियाँ (Notes)
(i) Conformity Assessment (अनुरूपता मूल्यांकन) तथा Conformity Assessment Body (अनुरूपता मूल्यांकन निकाय) केवल ISO/IEC 17000:2004 “Conformity Assessment – Vocabulary and General Principles” के खंड 2.1 एवं 2.4 में परिभाषित शब्द हैं।
प्रमाणपत्र संबंधी जानकारी (Certificate Information)
घोषणाओं (Declarations) अथवा निरीक्षण रिपोर्टों (Inspection Reports) में कम-से-कम निम्नलिखित जानकारी अवश्य सम्मिलित होनी चाहिए:
- ग्राहक (Client) का नाम
- ग्राहक का पूर्ण पता
- मूल्यांकन/निरीक्षण के लिए प्रयुक्त मानक (Assessment Standard(s))
- प्रारंभिक मूल्यांकन (Initial Assessment) की तिथि
- पुनः पुष्टि (Re-affirmation) की तिथि (यदि आवधिक निगरानी/Surveillance आवश्यक हो)
- प्रमाणपत्र जारी करने की तिथि
- प्रमाणपत्र की समाप्ति (Expiry) तिथि (यदि प्रमाणन की वैधता समय-सीमित हो)
- प्रमाणपत्र प्रदान करने वाले निकाय (Inspection Body) का नाम एवं पता
- प्रमाणपत्र की वैधता से संबंधित आवश्यक चेतावनियाँ (जैसे कि संतोषजनक प्रदर्शन, निगरानी निरीक्षण, अथवा अन्य शर्तों के अधीन होना)
- प्रमाणपत्र प्रदान करने वाले निरीक्षण निकाय (Inspection Body) का लोगो
- प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) का लोगो, यदि लागू हो
- ISO/IEC 17020:2012 के खंड 7.4 – “Inspection Reports and Inspection Certificates” में निर्दिष्ट सभी आवश्यक जानकारी
ISO/IEC 17020 निरीक्षण निकायों के प्रमाणपत्रों की शब्दावली, सामग्री एवं निर्गमन पर व्यापक मार्गदर्शिका (Comprehensive Guide to the Wording, Content, and Issuance of Certificates for ISO/IEC 17020 Inspection Bodies)
प्रस्तावना एवं परिचय (Presentation and Introduction)
वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त Conformity Assessment (अनुरूपता मूल्यांकन) प्रणाली के अंतर्गत निरीक्षण (Inspection) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। निरीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि कोई उत्पाद, प्रक्रिया, सेवा अथवा प्रणाली निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप है या नहीं। यह कार्य निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से किया जाता है।
ISO/IEC 17020:2012, जिसका शीर्षक है—
“Conformity Assessment — Requirements for the Operation of Various Types of Bodies Performing Inspection”
निरीक्षण निकायों (Inspection Bodies) की दक्षता (Competence), निष्पक्षता (Impartiality) तथा सुसंगत संचालन (Consistent Operation) के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानक है।
किसी मान्यता प्राप्त निरीक्षण निकाय (Accredited Inspection Body) द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणपत्र (Certificate) अथवा निरीक्षण रिपोर्ट (Inspection Report) केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है। यह उस निरीक्षण निकाय की अधिकारिक मान्यता, उसकी प्रक्रियाओं की कठोरता तथा निरीक्षण किए गए ग्राहक, उत्पाद, सेवा अथवा प्रणाली की सत्यापित स्थिति का आधिकारिक प्रमाण होता है।
इसी कारण इन प्रमाणपत्रों की भाषा (Wording), सामग्री (Content) तथा प्रस्तुति (Presentation) अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इनका प्रत्येक कथन स्पष्ट (Clear), सटीक (Precise), निष्पक्ष (Objective) तथा किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या (Misinterpretation) से मुक्त होना चाहिए, ताकि निरीक्षण प्रक्रिया तथा प्रत्यायन (Accreditation) प्रणाली पर वैश्विक विश्वास बना रहे।
यह मार्गदर्शिका प्रमाणपत्रों की शब्दावली, आवश्यक सामग्री तथा उनके निर्गमन से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य निरीक्षण निकायों, उनके ग्राहकों तथा प्रमाणपत्रों का उपयोग करने वाले सभी हितधारकों को उन सिद्धांतों की समग्र जानकारी प्रदान करना है, जिनके आधार पर ये महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जाते हैं, जिससे मान्यता प्राप्त योजनाओं (Accredited Schemes) के अंतर्गत घोषणाओं एवं पंजीकरण की शुद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
अनुभाग 1 : मूलभूत सिद्धांत (Foundational Principles) एवं प्रत्यायन (Accreditation) की भूमिका
1.1 अनुरूपता मूल्यांकन (Conformity Assessment) की प्रणाली
प्रमाणपत्रों से संबंधित आवश्यकताओं को समझने के लिए सबसे पहले उन अंतरराष्ट्रीय मानकों द्वारा परिभाषित अनुरूपता मूल्यांकन प्रणाली (Conformity Assessment Ecosystem) को समझना आवश्यक है।
ISO/IEC 17000:2004 – Conformity Assessment – Vocabulary and General Principles
यह अनुरूपता मूल्यांकन (Conformity Assessment) का मूलभूत मानक है, जिसमें इस क्षेत्र से संबंधित प्रमुख शब्दों एवं सिद्धांतों को परिभाषित किया गया है।
(क) Conformity Assessment (अनुरूपता मूल्यांकन) – खंड 2.1
अनुरूपता मूल्यांकन का अर्थ है—
“किसी उत्पाद, प्रक्रिया, प्रणाली, व्यक्ति अथवा निकाय से संबंधित निर्धारित आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रमाण प्रस्तुत करना।”
निरीक्षण (Inspection) इसी अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग है।
(ख) Conformity Assessment Body (CAB) – अनुरूपता मूल्यांकन निकाय – खंड 2.4
Conformity Assessment Body (CAB) वह संस्था है जो अनुरूपता मूल्यांकन संबंधी गतिविधियों का संचालन करती है।
ISO/IEC 17020 के अंतर्गत प्रत्यायित (Accredited) कोई भी निरीक्षण निकाय (Inspection Body), एक Conformity Assessment Body (CAB) माना जाता है।
ISO/IEC 17020:2012
यह मानक विशेष रूप से उन निरीक्षण निकायों (Inspection Bodies) के संचालन के लिए आवश्यक आवश्यकताओं (Requirements) को निर्धारित करता है जो निरीक्षण गतिविधियाँ संचालित करते हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निरीक्षण निकाय—
- सक्षम (Competent) हों।
- निष्पक्ष (Impartial) हों।
- अपनी सेवाएँ निरंतर एक समान गुणवत्ता (Consistent Operation) के साथ प्रदान करें।
यह मानक निम्नलिखित सभी प्रकार के निरीक्षण निकायों पर लागू होता है—
- Type A Inspection Body (पूर्णतः स्वतंत्र निरीक्षण निकाय)
- Type B Inspection Body
- Type C Inspection Body
1.2 प्रत्यायन (Accreditation) का उद्देश्य एवं उसकी घोषणा (Declaration)
प्रत्यायन (Accreditation) एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष (Third Party) द्वारा प्रदान की जाने वाली औपचारिक मान्यता है, जिसके माध्यम से यह प्रमाणित किया जाता है कि कोई अनुरूपता मूल्यांकन निकाय (CAB) विशिष्ट अनुरूपता मूल्यांकन गतिविधियों को करने में सक्षम (Competent) है।
निरीक्षण निकायों के संदर्भ में यह प्रत्यायन किसी अधिकृत प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body), जैसे कि Accreditation Service for Conformity Assessment Bodies (ASCAB) अथवा अन्य मान्यता प्राप्त प्रत्यायन संस्थाओं द्वारा प्रदान किया जाता है।
प्रत्यायन केवल एक बार किया जाने वाला मूल्यांकन नहीं है, बल्कि यह एक सतत (Continuous) प्रक्रिया है, जिसमें निम्नलिखित गतिविधियाँ सम्मिलित होती हैं—
- प्रारंभिक विस्तृत मूल्यांकन (Initial Assessment)
- तकनीकी दक्षता का सत्यापन
- प्रबंधन प्रणाली का मूल्यांकन
- निरीक्षण प्रक्रियाओं की समीक्षा
- कर्मियों की योग्यता का आकलन
- नियमित निगरानी (Surveillance Assessments)
- पुनर्मूल्यांकन (Re-assessment)
प्रत्यायन का महत्व
जब किसी निरीक्षण निकाय को ISO/IEC 17020 के अंतर्गत प्रत्यायन प्राप्त होता है, तब यह प्रमाणित होता है कि—
- उसकी प्रबंधन प्रणाली (Management System) मानक के अनुरूप है।
- उसके निरीक्षक (Inspectors) पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित एवं सक्षम हैं।
- निरीक्षण विधियाँ (Inspection Methodologies) तकनीकी रूप से विश्वसनीय हैं।
- निरीक्षण रिपोर्ट एवं प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया नियंत्रित एवं मानकीकृत है।
- संगठन निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।
इस प्रकार प्रत्यायन निरीक्षण निकाय की विश्वसनीयता (Credibility) एवं दक्षता (Competence) का प्रमाण होता है।
प्रमाणपत्र पर प्रत्यायन (Accreditation) का उल्लेख
जब किसी निरीक्षण निकाय द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्र पर प्रत्यायन (Accreditation) का उल्लेख किया जाता है, तब यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली दावा (Claim) होता है।
यह उल्लेख दर्शाता है कि—
- निरीक्षण कार्य एक प्रत्यायित (Accredited) निरीक्षण निकाय द्वारा किया गया है।
- निरीक्षण प्रक्रिया ISO/IEC 17020 की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की गई है।
- निरीक्षण निकाय का मूल्यांकन एक स्वतंत्र प्रत्यायन निकाय द्वारा किया गया है।
दूसरे शब्दों में, प्रत्यायन निकाय पर जो विश्वास (Trust) स्थापित होता है, वही विश्वास निरीक्षण निकाय द्वारा जारी प्रमाणपत्रों पर भी स्थानांतरित हो जाता है।
इसी कारण प्रमाणपत्र पर प्रयुक्त शब्दावली (Wording) अत्यंत सटीक (Precise), स्पष्ट (Clear) तथा भ्रामक व्याख्या से मुक्त होनी चाहिए।
प्रत्यायन संबंधी घोषणा (Accreditation Statement) का महत्व
प्रत्यायन संबंधी किसी भी घोषणा का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि—
- निरीक्षण निकाय सक्षम एवं प्रत्यायित है।
- उसका मूल्यांकन मान्यता प्राप्त प्रत्यायन निकाय द्वारा किया गया है।
- उसका प्रत्यायन केवल उसी कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation) तक सीमित है जिसके लिए उसे औपचारिक मान्यता प्रदान की गई है।
अतः प्रमाणपत्र में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द इस प्रकार होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति यह गलत निष्कर्ष न निकाले कि प्रत्यायन सीधे उत्पाद, सेवा या ग्राहक को प्राप्त है।
प्रत्यायन केवल निरीक्षण निकाय (Inspection Body) को प्राप्त होता है, न कि निरीक्षण किए गए उत्पाद, सेवा, प्रक्रिया या ग्राहक को।
यही सिद्धांत ISO/IEC 17020:2012 के अंतर्गत जारी किए जाने वाले प्रत्येक प्रमाणपत्र की विश्वसनीयता, निष्पक्षता एवं अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का आधार है।
अनुभाग 2 : प्रत्यायन (Accreditation) संदर्भ हेतु अनिवार्य शब्दावली (Mandatory Phrasing for Accreditation Reference)
प्रमाणपत्र पर प्रयुक्त प्रत्यायन संबंधी कथन (Accreditation Statement) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह स्पष्ट रूप से समझ सके कि निरीक्षण किस संस्था द्वारा किया गया, उसका मूल्यांकन किस प्रत्यायन निकाय द्वारा किया गया तथा यह कार्य किस अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप संपन्न हुआ।
नीचे दी गई शब्दावली एक मानक प्रारूप (Template) है, जिसे प्रमाणपत्रों पर उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है।
मानक शब्दावली (Standard Wording)
“यह एक प्रत्यायित (Accredited) प्रमाणपत्र है, जिसे [निरीक्षण निकाय का नाम, उदाहरणार्थ XXXX Inspection Services Ltd.] द्वारा जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है। इस निरीक्षण निकाय का मूल्यांकन [प्रत्यायन निकाय का नाम, उदाहरणार्थ Accreditation Service for Conformity Assessment Bodies LLC] द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार तथा ISO/IEC 17020:2012 — ‘Conformity Assessment — Requirements for the Operation of Various Types of Bodies Performing Inspection’ के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।”
2.1 प्रमुख वाक्यांशों (Key Phrases) का विस्तृत विश्लेषण
“यह एक प्रत्यायित (Accredited) प्रमाणपत्र है…”
यह वाक्य स्पष्ट रूप से घोषित करता है कि यह प्रमाणपत्र किसी प्रत्यायित (Accredited) निरीक्षण निकाय द्वारा जारी किया गया है।
यह इसे किसी सामान्य निरीक्षण रिपोर्ट, निजी राय अथवा गैर-प्रत्यायित दस्तावेज से अलग पहचान प्रदान करता है।
“प्रत्यायित” शब्द यह दर्शाता है कि प्रमाणपत्र की विश्वसनीयता निरीक्षण निकाय की प्रत्यायित स्थिति (Accredited Status) पर आधारित है।
“…जिसे [निरीक्षण निकाय] द्वारा जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है…”
यह वाक्य कानूनी (Legal) एवं व्यावसायिक (Professional) उत्तरदायित्व स्थापित करता है।
इसमें उस निरीक्षण निकाय का विधिक (Legal) नाम अंकित होना चाहिए जिसने—
- निरीक्षण किया,
- निष्कर्ष निकाले,
- तथा प्रमाणपत्र जारी किया।
प्रमाणपत्र पर सदैव संगठन का पंजीकृत (Registered) नाम ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
“…जिसका मूल्यांकन [प्रत्यायन निकाय] द्वारा किया गया है…”
यही इस प्रत्यायन कथन का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।
यह दर्शाता है कि निरीक्षण निकाय का मूल्यांकन किसी स्वतंत्र (Independent) एवं तृतीय-पक्ष (Third Party) प्रत्यायन निकाय द्वारा किया गया है।
प्रत्यायन निकाय का नाम पूर्णतः सही एवं आधिकारिक रूप में लिखा जाना चाहिए।
जहाँ संभव हो, ऐसा प्रत्यायन निकाय ILAC MRA (International Laboratory Accreditation Cooperation – Mutual Recognition Arrangement) अथवा अन्य अंतरराष्ट्रीय पारस्परिक मान्यता व्यवस्था का हस्ताक्षरकर्ता होना चाहिए, जिससे प्रमाणपत्र की वैश्विक स्वीकार्यता सुनिश्चित हो सके।
“…निर्धारित मानदंडों (Defined Criteria) के अनुसार…”
यह वाक्य अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि प्रत्यायन सामान्य (Generic) नहीं है।
“निर्धारित मानदंड” से आशय निम्नलिखित से हो सकता है—
- ISO/IEC 17020 की आवश्यकताएँ
- क्षेत्र-विशिष्ट योजनाएँ (Scheme Requirements)
- नियामकीय आवश्यकताएँ (Regulatory Requirements)
- विशेष निरीक्षण प्रक्रियाएँ
- उद्योग मानक
उदाहरण—
- Pressure Equipment Inspection
- Lifting Equipment Inspection
- Electrical Installation Inspection
- Structural Inspection
इसका अर्थ यह भी है कि निरीक्षण निकाय केवल उसी कार्यक्षेत्र (Scope of Accreditation) के लिए प्रत्यायित है जो उसके प्रत्यायन अनुसूची (Accreditation Schedule) में उल्लिखित है।
“…ISO/IEC 17020:2012 के अनुरूप…”
यह वाक्य स्पष्ट करता है कि निरीक्षण निकाय का मूल्यांकन किस अंतरराष्ट्रीय मानक के आधार पर किया गया है।
प्रमाणपत्र में सदैव निम्नलिखित का पूर्ण उल्लेख किया जाना चाहिए—
- मानक का पूरा नाम
- मानक का वर्ष (Year of Publication)
- आधिकारिक शीर्षक
अर्थात—
ISO/IEC 17020:2012
Conformity Assessment — Requirements for the Operation of Various Types of Bodies Performing Inspection
“के अनुरूप” अथवा “In Cognizance Of” का अर्थ है कि प्रत्यायन मूल्यांकन इसी मानक को आधार बनाकर किया गया है।

2.2 सामान्य त्रुटियाँ एवं गलत व्याख्याएँ (Common Errors and Misinterpretations to Avoid)
प्रमाणपत्र तैयार करते समय निम्नलिखित गलतियों से सदैव बचना चाहिए।
(1) उत्पाद अथवा सेवा को प्रत्यायित बताना
सबसे सामान्य त्रुटि यह है कि प्रमाणपत्र इस प्रकार लिखा जाता है जिससे ऐसा प्रतीत हो कि—
- उत्पाद प्रत्यायित है,
- सेवा प्रत्यायित है,
- अथवा ग्राहक प्रत्यायित है।
यह पूर्णतः गलत है।
प्रत्यायन (Accreditation) केवल निरीक्षण निकाय (Inspection Body) को प्राप्त होता है, उत्पाद, सेवा या ग्राहक को नहीं।
सही कथन होगा—
“निरीक्षण एक प्रत्यायित निरीक्षण निकाय द्वारा किया गया है।”
(2) प्रत्यायन के कार्यक्षेत्र (Scope) से अधिक दावा करना
यदि निरीक्षण निकाय को किसी विशेष प्रकार के निरीक्षण के लिए प्रत्यायन प्राप्त है, तो वह केवल उसी कार्यक्षेत्र में प्रत्यायन संबंधी दावा कर सकता है।
यदि किसी ऐसे निरीक्षण के लिए प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है जो उसके प्रत्यायित कार्यक्षेत्र में सम्मिलित नहीं है, तो उस प्रमाणपत्र पर—
- प्रत्यायन लोगो,
- प्रत्यायन कथन,
- अथवा Accreditation Claim
का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
(3) पुराने मानकों अथवा पुराने नामों का उपयोग
प्रमाणपत्र में कभी भी—
- समाप्त (Superseded) मानक,
- पुराने संस्करण,
- या पूर्व नाम वाले प्रत्यायन निकाय
का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए।
उदाहरण के लिए—
ISO/IEC 17020:1998 का उल्लेख तब नहीं किया जाना चाहिए जब वर्तमान मानक ISO/IEC 17020:2012 लागू हो।
इसी प्रकार यदि निरीक्षण निकाय या प्रत्यायन निकाय का नाम बदल चुका है, तो नवीनतम आधिकारिक नाम का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
(4) अस्पष्ट (Ambiguous) भाषा का उपयोग
प्रमाणपत्र पर ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए जिनसे भ्रम उत्पन्न हो।
उदाहरण—
- Accreditation की प्रक्रिया में है
- Approval प्राप्त है
- Recognized है
- Working Towards Accreditation
- Approved By
- Recognized Under
ये शब्द “Accredited” के समान अर्थ नहीं रखते।
यदि निरीक्षण निकाय वास्तव में प्रत्यायित है, तभी “Accredited” शब्द का उपयोग किया जाना चाहिए।
अनुभाग 3 : प्रमाणपत्र में अनिवार्य जानकारी (Mandatory Certificate Data and Content)
ISO/IEC 17020:2012 के खंड 7.4 – Inspection Reports and Inspection Certificates के अनुसार प्रत्येक निरीक्षण रिपोर्ट अथवा प्रमाणपत्र में इतनी जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि—
- उसका सही अर्थ निकाला जा सके,
- निरीक्षण की पूर्ण पहचान स्थापित हो सके,
- तथा आवश्यकता पड़ने पर सम्पूर्ण अभिलेख (Traceability) उपलब्ध कराए जा सकें।
इसलिए प्रत्येक प्रमाणपत्र में आवश्यक सूचनाएँ सुव्यवस्थित, स्पष्ट तथा सत्यापन योग्य रूप में प्रस्तुत की जानी चाहिए।
अगले भाग में इन सभी अनिवार्य सूचनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।
अनुभाग 3 : प्रमाणपत्र में अनिवार्य जानकारी एवं सामग्री (Mandatory Certificate Data and Content)
ISO/IEC 17020:2012 के खंड 7.4 – “Inspection Reports and Inspection Certificates” के अनुसार प्रत्येक निरीक्षण रिपोर्ट अथवा निरीक्षण प्रमाणपत्र में ऐसी सभी आवश्यक जानकारियाँ सम्मिलित होनी चाहिए जो उसकी सही व्याख्या (Interpretation), सत्यापन (Verification) तथा अनुरेखणीयता (Traceability) सुनिश्चित करें।
नीचे प्रत्येक अनिवार्य तत्व का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।
3.1 संबंधित पक्षों (Identification of Parties) की पहचान
(क) ग्राहक (Client) का नाम एवं पता
प्रमाणपत्र में उस विधिक इकाई (Legal Entity) का पूरा नाम एवं पता अंकित होना चाहिए जिसने निरीक्षण का अनुरोध किया है तथा जो निरीक्षणाधीन वस्तु, प्रणाली या सेवा के लिए उत्तरदायी है।
यह जानकारी निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है—
- संविदा (Contract) की वैधता
- उत्तरदायित्व (Responsibility) का निर्धारण
- बिलिंग एवं अभिलेख प्रबंधन
- निरीक्षण किए गए उत्पाद अथवा प्रणाली की स्पष्ट पहचान
(ख) प्रमाणपत्र जारी करने वाले निरीक्षण निकाय (Inspection Body) का नाम एवं पता
प्रमाणपत्र जारी करने वाले निरीक्षण निकाय का पूरा नाम, डाक पता एवं आवश्यक संपर्क विवरण स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
यदि निरीक्षण किसी विशेष शाखा या क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा किया गया हो, तो उस कार्यालय का विवरण भी शामिल किया जाना चाहिए।
इससे प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था की पहचान एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित होता है।
3.2 निरीक्षण गतिविधि (Inspection Activity) का विवरण
(क) मूल्यांकन/निरीक्षण मानक (Assessment Standard(s))
यह प्रमाणपत्र का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी भाग माना जाता है।
इसमें स्पष्ट रूप से निम्नलिखित जानकारी दी जानी चाहिए—
- निरीक्षण किस मानक, विनिर्देशन (Specification) अथवा कोड के अनुसार किया गया।
- उस मानक का संस्करण (Edition/Revision)।
- यदि लागू हो, तो निरीक्षण योजना (Inspection Plan) अथवा प्रक्रिया (Procedure) का संदर्भ।
उदाहरण :
DIN EN ISO 5817:2014, Quality Level B के अनुसार संरचनात्मक स्टील वेल्डिंग का निरीक्षण, निरीक्षण योजना IP-2023-01 के अनुरूप।
(ख) निरीक्षण की वस्तु (Object of Inspection)
प्रमाणपत्र में यह स्पष्ट रूप से वर्णित होना चाहिए कि निरीक्षण किस वस्तु, प्रक्रिया, सेवा अथवा प्रणाली का किया गया।
उदाहरण—
- उत्पाद (Product)
- मशीन
- उपकरण (Equipment)
- प्रेशर वेसल
- विद्युत प्रणाली
- अग्नि सुरक्षा प्रणाली
- निर्माण कार्य
- निर्माण प्रक्रिया
- सेवा
जहाँ आवश्यक हो, निम्नलिखित पहचान विवरण भी सम्मिलित किए जाने चाहिए—
- सीरियल नंबर
- बैच नंबर
- उपकरण पहचान संख्या
- संपत्ति संख्या
- पंजीकरण संख्या
3.3 तिथि संबंधी जानकारी (Chronological Data)
(क) प्रारंभिक निरीक्षण/मूल्यांकन की तिथि
यह वह तिथि (या तिथियाँ) होती हैं जब वास्तविक निरीक्षण कार्य किया गया।
यदि निरीक्षण कई दिनों तक चला हो, तो सम्पूर्ण अवधि का उल्लेख किया जाना चाहिए।
(ख) प्रमाणपत्र जारी करने की तिथि
यह वह तिथि है जिस दिन निरीक्षण रिपोर्ट का तकनीकी अनुमोदन (Technical Approval) होने के बाद प्रमाणपत्र आधिकारिक रूप से जारी किया गया।
यह आवश्यक नहीं कि यह निरीक्षण की तिथि के समान ही हो।
(ग) पुनः पुष्टि (Re-Affirmation) अथवा निगरानी निरीक्षण (Surveillance) की तिथि
यदि निरीक्षण योजना के अंतर्गत आवधिक निरीक्षण (Periodic Inspection) आवश्यक है, तो अगले निरीक्षण की तिथि का उल्लेख किया जाना चाहिए।
इससे ग्राहक को भविष्य में आवश्यक निरीक्षण की जानकारी प्राप्त होती है।
(घ) प्रमाणपत्र की समाप्ति तिथि (Expiry Date)
यदि प्रमाणपत्र सीमित अवधि के लिए वैध है, तो उसकी समाप्ति तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए।
यह विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों में लागू होती है—
- लिफ्टिंग उपकरण
- प्रेशर वेसल
- सुरक्षा उपकरण
- नियामकीय निरीक्षण
यदि प्रमाणपत्र केवल निरीक्षण की तिथि पर वस्तु की स्थिति को दर्शाता है, तो यह स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए—
“यह प्रमाणपत्र केवल निरीक्षण की तिथि पर निरीक्षण की गई वस्तु की स्थिति को दर्शाता है।”
3.4 वैधानिक एवं सीमित वैधता संबंधी शर्तें (Legal and Limiting Conditions)
आवश्यक चेतावनियाँ (Mandatory Disclaimer)
प्रमाणपत्र में ऐसी चेतावनियाँ सम्मिलित होनी चाहिए जो उसके दुरुपयोग को रोकें तथा उसकी सीमाएँ स्पष्ट करें।
इनमें सामान्यतः निम्नलिखित कथन शामिल होते हैं—
- यह प्रमाणपत्र केवल निरीक्षण की तिथि पर प्राप्त निष्कर्षों को दर्शाता है।
- प्रमाणपत्र की वैधता उचित रखरखाव (Maintenance) पर निर्भर करती है।
- निरीक्षण की गई वस्तु में बिना अनुमोदन के संशोधन (Modification) किए जाने पर प्रमाणपत्र अमान्य हो सकता है।
- यह प्रमाणपत्र बिना अनुमति हस्तांतरणीय (Non-transferable) नहीं है।
- निरीक्षण निकाय की जिम्मेदारी उसके नियमों एवं शर्तों (Terms and Conditions) तक सीमित है।
- प्रमाणपत्र में किसी भी प्रकार का अनधिकृत परिवर्तन इसे तत्काल अमान्य कर देगा।
स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता का कथन (Statement of Independence and Impartiality)
जहाँ आवश्यक हो, निरीक्षण निकाय यह घोषणा कर सकता है कि—
- निरीक्षण निष्पक्ष रूप से किया गया है।
- निरीक्षण ISO/IEC 17020 के अनुरूप किया गया है।
- निरीक्षण निकाय Type A, Type B अथवा Type C Inspection Body के रूप में कार्य करता है।
- निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार का हितों का टकराव (Conflict of Interest) नहीं था।
3.5 तकनीकी एवं अनुरेखणीय (Traceability) संबंधी जानकारी
प्रत्येक प्रमाणपत्र में निम्नलिखित तकनीकी जानकारी सम्मिलित होनी चाहिए—
(क) अद्वितीय प्रमाणपत्र संख्या (Unique Certificate Number)
प्रत्येक प्रमाणपत्र का एक विशिष्ट (Unique) क्रमांक होना चाहिए।
इसी क्रमांक के आधार पर निम्नलिखित अभिलेख प्राप्त किए जा सकें—
- निरीक्षण आदेश
- निरीक्षण रिपोर्ट
- निरीक्षण चेकलिस्ट
- फोटोग्राफ
- निरीक्षक के नोट्स
- परीक्षण परिणाम
(ख) निरीक्षण का स्थान (Location of Inspection)
जहाँ निरीक्षण किया गया, उस स्थान का पूरा पता प्रमाणपत्र में अंकित होना चाहिए।
यह ग्राहक के पते से भिन्न भी हो सकता है।
(ग) निरीक्षण करने वाले अधिकारी (Inspecting Personnel)
मुख्य निरीक्षक (Lead Inspector) तथा आवश्यक होने पर निरीक्षण दल के अन्य सदस्यों के नाम अथवा पहचान संख्या अंकित की जानी चाहिए।
इससे यह सिद्ध होता है कि निरीक्षण सक्षम (Competent) व्यक्तियों द्वारा किया गया।
(घ) निरीक्षण विधियाँ एवं परिणाम (Inspection Methods and Results)
प्रमाणपत्र में निरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रमुख विधियों का संक्षिप्त विवरण दिया जाना चाहिए।
उदाहरण—
- Visual Inspection
- Dimensional Verification
- Functional Testing
- Non-Destructive Testing (NDT)
- Ultrasonic Testing (UT)
- Magnetic Particle Testing (MT)
- Dye Penetrant Testing (PT)
इसके पश्चात निरीक्षण का निष्कर्ष स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए, जैसे—
“निरीक्षण किए गए उपकरण निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप पाए गए।”
या
“निरीक्षण के दौरान पाई गई असंगतियों (Non-Conformities) का विवरण संलग्न रिपोर्ट NCR-457 में दिया गया है।”
(ङ) अधिकृत हस्ताक्षर एवं पदनाम
प्रत्येक प्रमाणपत्र पर निरीक्षण निकाय के अधिकृत अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
हस्ताक्षरकर्ता निम्नलिखित में से कोई हो सकता है—
- Chief Inspector
- Certification Manager
- Technical Manager
- Authorized Signatory
सुरक्षित (Secure) एवं सत्यापन योग्य (Verifiable) इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर भी स्वीकार्य हैं।
3.6 लोगो एवं ब्रांडिंग (Logos and Branding)
प्रमाणपत्र पर सामान्यतः निम्नलिखित लोगो अंकित किए जाते हैं—
निरीक्षण निकाय (Inspection Body) का लोगो
यह प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था का आधिकारिक कॉर्पोरेट लोगो होता है।
प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) का लोगो
यदि निरीक्षण कार्य प्रत्यायित कार्यक्षेत्र (Accredited Scope) के अंतर्गत किया गया है, तो संबंधित प्रत्यायन निकाय का लोगो भी अंकित किया जा सकता है।
इसका उपयोग केवल प्रत्यायन निकाय द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
यह लोगो प्रमाणपत्र पर अंकित प्रत्यायन दावे (Accreditation Claim) का दृश्य प्रमाण (Visual Evidence) माना जाता है।
अनुभाग 4 : ISO/IEC 17020 के खंड 7.4 का व्यावहारिक अनुपालन (Operationalizing Clause 7.4)
ISO/IEC 17020:2012 का खंड 7.4 यह अपेक्षा करता है कि प्रत्येक निरीक्षण रिपोर्ट एवं प्रमाणपत्र—
- सटीक (Accurate) हो।
- स्पष्ट (Clear) हो।
- निष्पक्ष (Objective) हो।
- किसी प्रकार की अस्पष्टता (Ambiguity) से मुक्त हो।
इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरीक्षण निकाय के पास एक प्रभावी प्रबंधन प्रणाली (Management System) होना आवश्यक है।
इस प्रणाली में सामान्यतः निम्नलिखित नियंत्रण सम्मिलित होते हैं—
दस्तावेज नियंत्रण (Document Control)
प्रमाणपत्रों के सभी प्रारूप (Templates) नियंत्रित दस्तावेज होने चाहिए, जिनमें—
- संस्करण संख्या (Version Control)
- संशोधन इतिहास (Revision History)
- अनुमोदन (Approval)
का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
तकनीकी समीक्षा एवं अनुमोदन (Review and Authorization)
प्रत्येक प्रमाणपत्र जारी होने से पूर्व—
- तकनीकी समीक्षा (Technical Review)
- प्रशासनिक स्वीकृति (Administrative Authorization)
अधिकृत अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।
संशोधन एवं पुनः निर्गमन (Amendment and Re-Issuance)
यदि प्रमाणपत्र में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो उसके संशोधन एवं पुनः निर्गमन की लिखित प्रक्रिया होनी चाहिए।
जहाँ संभव हो, पूर्व में जारी अमान्य प्रमाणपत्र को वापस लेकर उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
अभिलेख संरक्षण (Record Retention)
प्रमाणपत्र एवं उससे संबंधित सभी दस्तावेज, निरीक्षण अभिलेख तथा सहायक रिकॉर्ड निर्धारित कानूनी, संविदात्मक एवं प्रत्यायन आवश्यकताओं के अनुसार सुरक्षित रखे जाने चाहिए।