सनातन धर्म शंकराचार्य

🔱 आदि शंकराचार्य और सनातन धर्म का संपूर्ण विवरण 🔱

सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है, जिसे हिन्दू धर्म के नाम से भी जाना जाता है। यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। इसमें वेद, उपनिषद, पुराण, महाभारत, रामायण, भगवद गीता, योग, ध्यान, कर्म, भक्ति, और ज्ञान का संगम है।

आदि शंकराचार्य (788-820 ई.) ने सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और पूरे भारत में सनातन धर्म को सुदृढ़ किया।


🔹 सनातन धर्म का परिचय

1. सनातन धर्म का अर्थ

🔹 “सनातन” का अर्थ है “शाश्वत” या “सदा रहने वाला”
🔹 सनातन धर्म किसी एक व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि यह ऋषि-मुनियों द्वारा वेदों और उपनिषदों के माध्यम से विकसित हुआ
🔹 यह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष (चार पुरुषार्थों) को स्वीकार करता है और कर्म सिद्धांत एवं पुनर्जन्म की मान्यता रखता है।


2. सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथ

🔹 वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद
🔹 उपनिषद – आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष का ज्ञान
🔹 पुराण – 18 महापुराण (जैसे विष्णु पुराण, शिव पुराण, देवी भागवत)
🔹 महाभारत – इसमें श्रीमद्भगवद गीता शामिल है
🔹 रामायण – भगवान राम के जीवन पर आधारित
🔹 भगवद गीता – कृष्ण द्वारा दिया गया अद्वितीय ज्ञान


3. सनातन धर्म के मूल तत्व

🔹 अहिंसा – किसी भी जीव को कष्ट न देना
🔹 सत्य – सच्चाई का पालन करना
🔹 धर्म – कर्तव्य और नैतिकता
🔹 कर्म – जैसा कर्म, वैसा फल
🔹 पुनर्जन्म – आत्मा अमर है और शरीर बदलता है
🔹 मोक्ष – जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति


🔱 आदि शंकराचार्य: जीवन परिचय

1. जन्म और बचपन

🔹 आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ई. में केरल के कालड़ी गाँव में हुआ था।
🔹 उनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम आर्यम्बा था।
🔹 बाल्यकाल से ही वे अत्यंत प्रतिभाशाली थे और छोटी उम्र में ही वेदों और शास्त्रों का अध्ययन पूरा कर लिया था।


2. संन्यास ग्रहण

🔹 8 वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लेने का निश्चय किया।
🔹 उन्होंने गोविंदा भगवत्पाद से दीक्षा ली और वेदांत दर्शन का अध्ययन किया।
🔹 उन्हें ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ और उन्होंने पूरे भारत में धर्म का प्रचार करने का संकल्प लिया।


🔱 आदि शंकराचार्य का योगदान

1. अद्वैत वेदांत की स्थापना

🔹 शंकराचार्य ने “अद्वैत वेदांत” का प्रचार किया, जिसमें बताया गया कि –

👉 “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः”
👉 अर्थात् “ब्रह्म (परमात्मा) ही सत्य है, यह संसार एक माया है, और आत्मा एवं परमात्मा में कोई भेद नहीं है।”

🔹 उन्होंने चार महावाक्यों को प्रचारित किया –

महावाक्यअर्थ
अहं ब्रह्मास्मि“मैं ही ब्रह्म हूँ” (बृहदारण्यक उपनिषद)
तत्त्वमसि“तू वही है” (छांदोग्य उपनिषद)
अयमात्मा ब्रह्म“यह आत्मा ही ब्रह्म है” (मांडूक्य उपनिषद)
प्रज्ञानं ब्रह्म“शुद्ध चेतना ही ब्रह्म है” (ऐतरेय उपनिषद)

2. शास्त्रार्थ और सनातन धर्म की पुनर्स्थापना

🔹 शंकराचार्य ने भारत के विभिन्न स्थानों पर यात्रा कर बौद्धों, जैनों और अन्य मतावलंबियों के साथ शास्त्रार्थ किया और वेदांत को सर्वोच्च सिद्ध किया।
🔹 उन्होंने अंधविश्वास, मूर्तिपूजा की गलत व्याख्या, और कर्मकांडों का खंडन किया।


3. चार मठों की स्थापना

उन्होंने चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना की, जिससे सनातन धर्म की रक्षा हो सके –

मठस्थानवेदमहामंडलेश्वर
शृंगेरी मठकर्नाटकयजुर्वेददक्षिण भारत
द्वारका मठगुजरातसामवेदपश्चिम भारत
ज्योतिष मठउत्तराखंडऋग्वेदउत्तर भारत
गोवर्धन मठपुरी, ओडिशाअथर्ववेदपूर्वी भारत

4. भगवद गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य

🔹 उन्होंने भगवद गीता, उपनिषदों और ब्रह्मसूत्र पर व्याख्या लिखी, जिससे वैदिक ज्ञान को सरल भाषा में समझाया जा सके।
🔹 उन्होंने भक्ति और ज्ञान को समान रूप से महत्व दिया।


5. प्रमुख मंदिरों का पुनरुद्धार

🔹 उन्होंने कई हिन्दू मंदिरों का पुनर्स्थापन किया, जैसे –
✔ केदारनाथ
✔ बद्रीनाथ
✔ पुरी जगन्नाथ
✔ रामेश्वरम


🔱 आदि शंकराचार्य की मृत्यु (संन्यास लीला)

🔹 शंकराचार्य ने 32 वर्ष की अल्पायु में ही ब्रह्मलीन हो गए।
🔹 कुछ ग्रंथों के अनुसार, उनकी मृत्यु केदारनाथ में हुई और कुछ के अनुसार, कांची में।


🔱 शंकराचार्य का प्रभाव आज भी क्यों महत्वपूर्ण है?

✅ उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा की और वेदांत को पुनर्स्थापित किया।
✅ आज भी चारों मठों के शंकराचार्य सनातन धर्म के मार्गदर्शक हैं।
भारत के मंदिरों, गुरुकुलों और आश्रमों में उनकी शिक्षाएँ जीवित हैं।
✅ उनका अद्वैत वेदांत दर्शन आज भी भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का आधार है।


🔱 निष्कर्ष

आदि शंकराचार्य केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक दिव्य शक्ति थे, जिन्होंने हिन्दू धर्म को पुनर्जीवित किया और पूरे भारत में सनातन धर्म को संगठित किया।

आज भी उनकी शिक्षाएँ हमारे जीवन को सही दिशा देने में सहायक हैं।

🚩 सनातन धर्म की जय!
🚩 आदि शंकराचार्य की जय!

"सनातन धर्म – न आदि, न अंत, केवल सत्य और अनंत!"

  1. 🚩 “सनातन धर्म है शाश्वत, सत्य का उजियारा,
    अधर्म मिटे, जग में फैले ज्ञान का पसारा।
    धर्म, कर्म, भक्ति, ज्ञान का अद्भुत संगम,
    मोक्ष का मार्ग दिखाए, यही है इसका धरम!” 🙏

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