🚩 सनातन धर्म के 51 शक्तिपीठ 🚩
शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान हैं जहाँ माता सती के शरीर के अंग, वस्त्र या आभूषण गिरे थे। ये सभी स्थान देवी शक्ति की पूजा के प्रमुख केंद्र हैं और इन्हें सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। शक्तिपीठों का वर्णन पुराणों, तंत्र ग्रंथों और देवी भागवत महापुराण में मिलता है।
🔱 शक्तिपीठों की उत्पत्ति की कथा 🔱
🔹 देवी सती ने जब अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपमान सहन नहीं किया तो उन्होंने हवन कुंड में आत्मदाह कर लिया।
🔹 भगवान शिव, माता सती के शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में विलाप करने लगे।
🔹 तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया, जो पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे।
🔹 जहाँ-जहाँ माता के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
🔱 51 शक्तिपीठों की सूची 🔱
1️⃣ भारत में स्थित शक्तिपीठ 🔱
क्र. | शक्तिपीठ | स्थान (राज्य) | माता | भैरव |
---|---|---|---|---|
1 | माँ कामाख्या | असम, गुवाहाटी | कामाख्या | उमानंद |
2 | माँ कालीघाट | पश्चिम बंगाल, कोलकाता | काली | नक्तेश्वर |
3 | माँ तारापीठ | पश्चिम बंगाल, बीरभूम | तारा | महाकाल |
4 | माँ वैष्णो देवी | जम्मू-कश्मीर, कटरा | वैष्णवी | भैरवनाथ |
5 | माँ ज्वालामुखी | हिमाचल प्रदेश, कांगड़ा | ज्वाला | उन्नमत भैरव |
6 | माँ नैना देवी | हिमाचल प्रदेश | नैना | कपालभैरव |
7 | माँ चिंतपूर्णी | हिमाचल प्रदेश | चिंतपूर्णी | रुद्राक्ष भैरव |
8 | माँ मनसा देवी | हरियाणा | मनसा | शिरीषानंद |
9 | माँ विष्णुपुर शक्तिपीठ | पश्चिम बंगाल | अंबिका | सर्वानंद |
10 | माँ विंध्यवासिनी | उत्तर प्रदेश, विंध्याचल | विंध्यवासिनी | कालभैरव |
11 | माँ ललिता देवी | उत्तर प्रदेश, प्रयागराज | ललिता | भैरव |
12 | माँ वाराही देवी | उत्तर प्रदेश, वाराणसी | वाराही | महामृत्युंजय |
13 | माँ महालक्ष्मी | महाराष्ट्र, कोल्हापुर | महालक्ष्मी | कोल्हापुर भैरव |
14 | माँ तुलजा भवानी | महाराष्ट्र, सोलापुर | तुलजा भवानी | अमरनाथ |
15 | माँ रेणुका देवी | महाराष्ट्र, माहूर | रेणुका | महेश |
16 | माँ हिंगलाज भवानी | बलूचिस्तान (पाकिस्तान) | हिंगलाज | केतुभानंद |
17 | माँ करवीर शक्ति | महाराष्ट्र | महालक्ष्मी | महाकाल |
18 | माँ गिरिजा देवी | उत्तराखंड | गिरिजा | लोकपाल |
19 | माँ शारदा देवी | मध्य प्रदेश, मैहर | शारदा | कालभैरव |
20 | माँ त्रिपुर सुंदरी | त्रिपुरा | त्रिपुरसुंदरी | त्रिपुरेश |
2️⃣ नेपाल और अन्य देशों में स्थित शक्तिपीठ 🔱
क्र. | शक्तिपीठ | स्थान | माता | भैरव |
---|---|---|---|---|
21 | माँ गुह्येश्वरी | नेपाल, काठमांडू | गुह्येश्वरी | कालभैरव |
22 | माँ हिंगलाज भवानी | पाकिस्तान, बलूचिस्तान | हिंगलाज | केतुभानंद |
23 | माँ जयंती | बांग्लादेश | जयंती | केलंक |
24 | माँ भवानी | श्रीलंका | भवानी | रक्षसेश्वर |
3️⃣ अन्य प्रमुख शक्तिपीठ 🔱
क्र. | शक्तिपीठ | स्थान | माता | भैरव |
---|---|---|---|---|
25 | माँ सुंदरी | बंगाल | सुंदरी | त्रैलोक्य भैरव |
26 | माँ उग्रतारा | असम | उग्रतारा | शिवानंद |
27 | माँ भद्रकाली | हरियाणा | भद्रकाली | अमरनाथ |
28 | माँ त्रिपुरा भैरवी | हिमाचल | त्रिपुरा भैरवी | त्रिपुरेश |
29 | माँ ललिता | प्रयागराज | ललिता | भैरव |
30 | माँ सुंदरी देवी | कांगड़ा | सुंदरी | शिव |
🔱 शक्तिपीठों का महत्व 🔱
✅ तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व: हिंदू धर्म में शक्तिपीठों की यात्रा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
✅ तांत्रिक और साधना केंद्र: शक्तिपीठों को शक्ति साधना और तंत्र साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है।
✅ मनोकामना पूर्ति: भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह विशेष स्थल हैं।
✅ शक्ति की उपासना: यहाँ देवी को शक्ति के विभिन्न रूपों में पूजा जाता है, जैसे महाकाली, महालक्ष्मी, महा सरस्वती आदि।
🌸 निष्कर्ष 🌸
🚩 शक्तिपीठ हिंदू धर्म के पवित्र तीर्थस्थल हैं, जो माता सती के विभिन्न अंगों के गिरने से बने।
🚩 ये स्थान शक्ति साधना, तंत्र साधना और भक्ति मार्ग के लिए अति महत्त्वपूर्ण हैं।
🚩 सनातन धर्म में शक्तिपीठों की यात्रा, माता के दर्शन और उपासना को मोक्षदायी बताया गया है।
🚩 हर भक्त को जीवन में कम से कम एक बार शक्तिपीठों के दर्शन करने का प्रयास अवश्य करना चाहिए।
🔱 “जय माता दी!” 🔱